फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी हासिल-करने का आरोप:नगर निगम के सिटी प्लानर लिखार को हाई कोर्ट ने पद से हटाने के आदेश दिए

By Abhishek Raghuvanshi
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नगर निगम के चीफ सिटी प्लानर नीरज आनंद लिखार को इस पद से हटाकर किसी और को पद सौंपे जाने के आदेश हाई कोर्ट की प्रिंसिपल बेंच जबलपुर ने जारी किए हैं। दरअसल, लिखार पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी हासिल करने के आरोप में याचिका दायर की गई थी। याचिका में उल्लेख किया गया था कि नीरज आनंद के बड़े भाई अजय लिखार ने फर्जी जाति प्रमाण से सरकारी नौकरी हासिल की थी। उनका जाति प्रमाण पत्र फर्जी साबित हुआ था तो उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। याचिकाकर्ता ने याचिका में उल्लेख किया था कि नीरज आनंद ने नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में अपने भाई की जाति वाला प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी हासिल की है। उन्हें भी बर्खास्त कर, दिए गए वेतन व अन्य सुविधाओं की वसूली की जाए। जस्टिस विशाल मिश्रा की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई थी। विगत सोमवार को हाई कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए उन्हें इंदौर नगर निगम में पद से हटाने के आदेश दिए।कमेटी के पास लंबित है मामलाहाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद नोटिस जारी किए थे। शासन की ओर से जवाब दिया गया कि प्रमाण पत्र की जांच कराए जाने के लिए 9 अप्रैल 2025 को ही हाईपॉवर कमेटी के पास भेज दिया था। कमेटी के पास अभी यह मामला लंबित है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि नीरज आनंद नगर निगम इंदौर में सिटी प्लानर के महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं, इसलिए जांच पूरी होने तक उन्हें निलंबित रखा जाना चाहिए। राज्य के वकील ने कहा कि चूंकि मामला हाईपॉवर कमेटी के पास है और जब तक रिपोर्ट नहीं मिल जाती, तब तक ऐसा कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता। *30 जून को होगी अगली सुनवाई* कोर्ट ने आदेश में कहा कि तथ्य यह है कि बड़े भाई का जाति प्रमाण पत्र फर्जी साबित हो चुका है। नीरज आनंद भी उसी जाति के हैं। इन परिस्थितियों में नीरज आनंद को नगर निगम इंदौर में सिटी प्लानर के पद पर कार्य करने की अनुमति देना उचित नहीं होगा। सिटी प्लानर का कार्य किसी अन्य व्यक्ति को सौंपा जा सकता है, लेकिन नीरज को नहीं, क्योंकि उनका जाति प्रमाण-पत्र संदिग्ध पाया गया है। सेवा के प्रारम्भ में ही उनके जाति प्रमाण-पत्र पर फर्जी जाति प्रमाण-पत्र लगा हुआ है। इन परिस्थितियों में अंतरिम राहत के रूप में निर्देशित किया जाता है कि वे मामले में उच्चाधिकार जांच समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने तक नीरज से सिटी प्लानर का कार्य न लें।

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