
मध्य प्रदेश में एक नाबालिग बेटी अपने बीमार पिता को लिवर डोनेट करना चाहती है। इस ममले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में 27 जून को सुनवाई है। इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज और प्रदेश सरकार द्वारा अनुमति मिलने के बाद अब बेटी को पूरी आशा है कि उसे कोर्ट से भी लिवर डोनेट करने की अनुमति मिल सकती है।
देश में नाबालिग द्वारा ऑर्गन डोनेशन का संभवत: दूसरा केस।
बेटी की उम्र 17 वर्ष 10 माह है, इसलिए अनुमति है जरूरी।
उसके पिता पिछले छह साल से लिवर की बीमारी से पीड़ित हैं।
इंदौर। मध्य प्रदेश में अपने पिता की जान बचाने के लिए लिवर दान करने की नाबालिग बेटी की कोशिश अब रंग लाती नजर आ रही है। मामले में एमजीएम मेडिकल कॉलेज बोर्ड के बाद अब राज्य शासन ने भी नाबालिग को लिवर देने की अनुमति दे दी है। अब मामले की सुनवाई 27 जून को है, जिसमें राज्य शासन की रिपोर्ट पेश की जाएगी। इसके बाद हाई कोर्ट द्वारा नाबालिग के लिवर देने की याचिका के पक्ष में निर्णय संभावित है। मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों का दावा है कि नाबालिग द्वारा लिवर देने का यह मध्य प्रदेश का पहला मामला है। वहीं देश का संभवत: यह दूसरा मामला है। राज्य शासन ने मंगलवार को अनुमति की रिपोर्ट एमजीएम मेडिकल कॉलेज भी भेज दी है। राज्य शासन द्वारा रिपोर्ट भेजने के बाद अब बेटी को उम्मीद जागी है कि अगली सुनवाई में उसे लिवर ट्रांसप्लांट संबंधी अनुमति मिल जाएगी, जिससे वह अपने पिता की जान बचा पाएगी।
सोमवार को नहीं मिल पाई थी अनुमति
उल्लेखनीय है कि मामले को लेकर मध्य प्रदेश हई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में चल रही याचिका में सोमवार को स्वास्थ्य आयुक्त को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी, लेकिन उन्होंने नहीं की। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि दो दिन में अनिवार्य रूप से रिपोर्ट प्रस्तुत कर दें।
यह है पूरा मामला
दरअसल बेटमा निवासी 42 वर्षीय शिवनारायण बाथम को डाक्टरों ने लिवर ट्रांसप्लांट की सलाह दी है। वे पिछले छह वर्ष से लिवर की बीमारी से पीड़ित हैं। शिवनारायण की बेटी प्रीति अपने पिता को अपना लिवर देने को तैयार है, लेकिन उसकी आयु 17 वर्ष 10 माह होने से वह बगैर कोर्ट की अनुमति के अपना लिवर नहीं दे सकती।

