धार भोजशाला मामले में एमपी हाई कोर्ट का सवाल- क्या मंदिर तोड़कर बनाई है कमाल मौला मस्जिद, होगा एएसआइ का सर्वे

By Abhishek Raghuvanshi
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  • ज्ञानवापी की तर्ज पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण करेगा सर्वे। कोर्ट ने कहा- परिसर में मौजूद चल-अचल प्रत्येक वस्तु की कार्बन डेटिंग तकनीक से करें जांच।
  • एएसआइ की टीम भोजशाला के 50 मीटर परिक्षेत्र में जीपीआर, जीपीएस तकनीकों से करेगी जांच।
  • 19 फरवरी को सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया था जो सोमवार को जारी हुआ।
  • 34 पेज के इस आदेश में कहा कि पूजा के अधिकार को लेकर कोर्ट एएसआइ की सर्वे रिपोर्ट के बाद ही विचार करेगी।

इंदौर। ज्ञानवापी की तर्ज पर धार भोजशाला का भी सर्वे होगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के पांच वरिष्ठ अधिकारी अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर पता लगाएंगे कि क्या भोजशाला परिसर स्थित कमाल मौला मस्जिद सरस्वती मंदिर में तोड़फोड़ कर बनाई गई है। सर्वेक्षण की रिपोर्ट छह सप्ताह में मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।
एएसआइ की टीम भोजशाला के 50 मीटर परिक्षेत्र में जीपीआर, जीपीएस तकनीकों से जांच करेगी। कोर्ट ने एएसआइ से यह भी कहा है कि वह परिसर में स्थित हर चल-अचल वस्तु, दीवारें, खंभे, फर्श सहित सभी की कार्बन डेटिंग तकनीक से जांच करे। इसके अलावा भी उसे लगता है कि वास्तविकता तक पहुंचने के लिए कुछ अन्य जांच करना है तो कर सकती है। कोर्ट ने एएसआइ को सर्वे के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। अगली सुनवाई 29 अप्रैल को होगी।

भोजशाला को लेकर चल रही हैं कई याचिकाएं
भोजशाला को लेकर मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के समक्ष अलग-अलग याचिकाएं चल रही हैं। इन्हीं में से एक याचिका वाराणसी की ज्ञानवापी के सर्वे को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वाली लखनऊ की संस्था हिंदू फ्रंट फार जस्टिस की है। भोजशाला को लेकर प्रस्तुत याचिका में संस्था ने अंतरिम आवेदन प्रस्तुत कर ज्ञानवापी की तर्ज पर भोजशाला का भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से सर्वे करवाने की मांग की थी।

34 पेज का आदेश
याचिका में कहा है कि मुसलमानों को भोजशाला में नमाज पढ़ने से रोका जाए और हिंदुओं को नियमित पूजा का अधिकार दिया जाए। हर मंगलवार हिंदू भोजशाला में यज्ञ कर उसे पवित्र करते हैं और शुक्रवार को मुसलमान नमाज के नाम पर उन्हीं यज्ञ कुंडों में थूककर उन्हें अपवित्र कर देते हैं। 19 फरवरी को सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया था, जो सोमवार को जारी हुआ। 34 पेज के इस आदेश में कोर्ट ने यह भी कहा है कि पूजा के अधिकार को लेकर कोर्ट एएसआइ की सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत होने के बाद ही विचार करेगी।

  • यह कहा है कोर्ट ने 34 पेज के फैसले में
  • एएसआइ सर्वे विज्ञानी तरीके से करे। इसके लिए अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए। जीपीआर और जीपीएस सर्वे किया जाए।
  • सर्वे भोजशाला परिसर के आसपास के 50 मीटर परिक्षेत्र में होगा।
  • सर्वे में एएसआइ कार्बन डेटिंग तकनीक का इस्तेमाल करेगा ताकि भोजशाला परिसर में मौजूद प्रत्येक चल-अचल वस्तु, पिल्लर, फर्श, दीवार आदि की वास्तविक उम्र का पता चल सके।
  • पूरे सर्वे की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी करवाई जाए। इस दौरान दोनों पक्षों के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे।
  • भोजशाला परिसर के बंद कमरे और हाल आदि को भी खोला जाए। इनमें मौजूद प्रत्येक वस्तु की कार्बन डेटिंग की जाए। इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाए।
  • भोजशाला का वास्तविक सच सामने आएगा

विज्ञानी सर्वे के माध्यम से भोजशाला का वास्तविक सच सामने आएगा। आगामी छह सप्ताह में कार्बन डेटिंग प्रणाली से जांच करने के अलावा अन्य सारी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद जो रिपोर्ट आएगी, वह इस धरोहर के लिए महत्वपूर्ण होगी। हमें उम्मीद है कि रिपोर्ट के बाद में भोजशाला में हिंदू समाज को पूजा-अर्चना की पूर्ण रूप से अनुमति होगी। – आशीष गोयल, याचिककर्ता, धार

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सुप्रीम कोर्ट में आवेदन देंगे
उच्च न्यायालय इंदौर खंडपीठ का जो फैसला आया हैं, हम उसका सम्मान करते हैं, लेकिन इसके खिलाफ हम सुप्रीम कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत करेंगे। 1902 में सर्वे हो चुका है। – वकार सादिक, शहर काजी, धार

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