1 जुलाई से कई नए कानून लागू होंगे, जिनमें मॉब लिंचिंग और नाबालिग से दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों के लिए फांसी या उम्रकैद की सजा का प्रावधान होगा। इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) की जगह भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), क्रिमिनल प्रोसिजर कोड (सीआरपीसी) की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), और एविडेंस एक्ट की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू होंगे।
इन बदलावों के तहत, आपराधिक मामलों की धाराओं और न्यायिक प्रक्रियाओं में परिवर्तन होगा। उदाहरण के लिए, हत्या के मामले में अब 302 आईपीसी की जगह 103 बीएनएस और दुष्कर्म के मामले में 376 आईपीसी की जगह 64 बीएनएस लागू होगी।30 जून की रात 12 बजे के बाद दर्ज होने वाले सभी मुकदमे नए कानूनों के अनुसार ही दर्ज होंगे। पुलिस विभाग अपने अनुसंधान अधिकारियों को इन नए कानूनों के लिए ट्रेनिंग दे रहा है। इससे पुलिस की जांच प्रक्रिया और ट्रायल कोर्ट में मामलों के निपटारे का समय निश्चित होगा, जिससे आम जनता को जल्दी न्याय मिल सकेगा।
