इंदौर में पुलिसकर्मियों का वसूली गिरोह:घर में घुस तलाशी ली, धमकाकर 27 लाख रुपए ऐंठे; एसीपी की जांच में 8 दोषी‎

By Abhishek Raghuvanshi
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इंदौर में एसआई और 3 हेड कांस्टेबल व एक सैनिक ने गिरोह की तरह काम करके एक युवक से 27 लाख रुपए ऐंठ लिए। युवक के ही दोस्त के साथ मिलकर इन्होंने उसे धमकाया। फिर एसीपी ऑफिस में बैठाकर पूछताछ की। इसके बाद घर में तलाशी ली। इस दौरान घर से पिस्टल जब्त करने के साथ ही रुपए, मोबाइल और लैपटॉप तक ले गए।
बाद में केस से बचाने के नाम पर युवक की पत्नी और साले से भी रुपए वसूले। युवक की एसयूवी और गहने भी गिरवी रखवा दिए। युवक और उसका परिवार इतना डर गया कि महीनों तक इंदौर ही नहीं आए।
बाद में दोस्तों के समझाने पर वरिष्ठ पुलिस अफसरों से शिकायत की। पुलिस कमिश्नर ने जांच करवाई तो सभी पुलिसवाले दोषी पाए गए। ये घटना पंचवटी कॉलोनी निवासी अनिल के साथ हुई। हेड कांस्टेबल जितेंद्र सेन, हेड कांस्टेबल (चालक) नीरज गुर्जर, हेड कांस्टेबल पप्पू परमार और एसीपी खजराना कार्यालय के सैनिक प्रवीण लौट, एवजी कर्मचारी गब्बर, यश वर्मा और तिलक नगर थाने के एसआई प्रदीप बर्वे ने उसे फंसाने के लिए प्रताड़ित किया और लाखों वसूले।
दोस्त ने रची साजिश… घर में पिस्टल, लाखों रखे हैं
फरियादी अनिल पाटीदार के मुताबिक, पूरे मामले में मास्टर माइंड दोस्त यश वर्मा है। डेढ़ साल पहले उनके दोस्त योगेश ने आत्महत्या के लिए एक पिस्टल खरीदी थी। यह बात पता चलने पर वह पिस्टल अपने घर ले आया था। इसकी जानकारी यश को थी। यश ने यह बात पुलिसकर्मियों को बता दी। 20 अक्टूबर 2023 की शाम 7 से 8 बजे के बीच अनिल अपने साले धर्मेंद्र और दोस्त सतीश व अन्य के साथ ओमेक्स सिटी के पास कार में था।
तभी हेड कांस्टेबल जितेंद्र सेन, नीरज गुर्जर और गब्बर वहां पहुंचे। उन्होंने खुद को क्राइम ब्रांच का बताया और गाड़ी की चाबी निकाल ली। तीनों मुझे खजराना एसीपी कार्यालय ले गए। फिर पूरे घर की तलाशी ली। इस दौरान उन्होंने पत्नी शिखा से बदसलूकी भी की। अनिल ने बताया, तलाशी में पुलिस वालों ने घर में रखे 12 लाख 50 हजार पहले ही रख लिए। मोबाइल और लैपटॉप भी उठा लाए।
गहने और एसयूवी तक गिरवी रखे
पिस्टल मिलने के बाद दोस्त यश वर्मा षड्यंत्र के मुताबिक सैनिक प्रवीण के साथ एसीपी कार्यालय आ गया। पत्नी शिखा को धमकाकर डेढ़ लाख ऐंठ लिए। फिर साले व दोस्तों से भी वसूली की। हमारी एसयूवी और जेवर तक गिरवी रखवा लिए।
4 माह बाद जांच रिपोर्ट में दोषी मिले
एसीपी परदेशीपुरा नरेंद्र रावत ने मामले में 4 महीने तक जांच की। जांच में सभी पुलिस वाले दोषी पाए गए। फरियादी अनिल ने कहा कि अब भी यदि एफआईआर नहीं लिखेंगे तो कोर्ट की शरण में जाऊंगा। इसके लिए तैयारी कर ली है।
पुलिसकर्मियों का कृत्य घोर कदाचरण, इसमें निजी व्यक्तियों की भी भूमिका
अनिल पाटीदार के साथ हुई घटना में निजी व्यक्तियों के साथ पुलिस जवानों ने मिलकर षड्यंत्रपूर्वक अपने अधिकारों से बाहर जाकर अमर्यादित आचरण किया है। इनका कृत्य घोर कदाचरण की श्रेणी में आता है। जो पुलिस रेग्यूलेशन का उल्लंघन है। – नरेंद्र सिंह रावत, एसीपी परदेशीपुरा

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