आज पब-बार बंद कर लेना साहब की गश्त है

By Abhishek Raghuvanshi
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  • संचालक समय पर बार बंद तो करते ही हैं नियंत्रण कक्ष को वीडियो भी भेजते हैं।

प्रोबेशनर आइपीएस की जबरदस्त धाक है। नियम विपरीत चलने वाले पब-बार संचालक इतना नहीं घबारते जितना पुलिसवाले। शाम होते ही पुलिसकर्मी काल कर बता देते हैं कि आज साहब की गश्त है। होटल, पब, बार समय पर बंद हो जाना चाहिए। 2020 बैच के आइपीएस कृष्ण लालचंदानी जोन-2 में बतौर एसीपी (विजयनगर) में पदस्थ हैं। एसीपी प्रत्येक रविवार को रात्रि गश्त करते हैं और हर बार एक न एक होटल, पब, बार पर कार्रवाई होती है। तीन पबों पर हुई कार्रवाई में थाना प्रभारियों से सवाल-जवाब होते हैं। संचालकों से संबंधों में दरार अलग पड़ जाती है। अफसरों ने इसका तोड़ निकाला है। रात्रि गश्त की जानकारी लेकर इत्तला कर देते हैं कि आज जरा अतिरिक्त सावधानी रखें। नए आइपीएस हैं। छापा पड़ा तो कोई नहीं रोक पाएगा। संचालक समय पर बार बंद तो करते ही हैं नियंत्रण कक्ष को वीडियो भी भेजते हैं।

शराब माफिया पर मेहरबान पुलिस छोटे और घरेलू झगड़ों में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई कर जेल भिजवाने वाली पुलिस शराब माफियाओं पर मेहरबान नजर आई। सरेराह अपहरण करने वाले मुलजिमों को न सिर्फ थाने से छोड़ दिया बल्कि देखभाल में भी कमी नहीं छोड़ी। शराब माफिया और उसके कर्मचारी चाहते थे कि तस्कर (पीड़ित) उसकी शराब बेचे। इसलिए वह अपने अंदाज में सबक सिखाने के लिए खुद की स्क्वाड़ लेकर पहुंचा और खातीवाला टैंक से अगवा कर लिया। पुलिस ने तस्कर की पत्नी की शिकायत पर शराब माफिया को मुलजिम बनाया लेकिन थाने में मेहरबानी भी दिखाई। आनन-फानन में लिखा-पढ़ी कर यह कहते हुए रवानगी दे दी गई कि उक्त धाराओं में नोटिस का ही प्रविधान है। उंगली न उठे इसलिए आरोपितों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की। बाकायदा गिरफ्तारी दर्शाकर एसीपी के समक्ष कोर्ट में पेशी हुई लेकिन यहां भी तय रूपरेखा के अनुसार जमानत स्वीकृत कर हाथों-हाथ रवानगी दे दी गई।

बैठने का ठीया ढूंढ रही स्पेशल टास्क फोर्स
संगठित गिरोह की पड़ताल करने वाली स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) खुद ठीया ढूंढ रही है। पोस्टिंग की भरमार होने से अफसर गलियारों में बैठकर दिन गुजारते हैं। एसटीएफ का फिलहाल पीपल्याहाना चौराहे पर साइबर सेल के ऊपर आफिस है। इक्के-दुक्के जवानों से काम चलाने वाली इस विंग में तत्कालीन एडीजी विपिन माहेश्वरी के कारण कोई आना नहीं चाहता था। उनके जाते ही दनादन पोस्टिंग हुई और एक साथ 14 निरीक्षक और दो डीएसपी हो गए। दो हाल और दो रूम से संचालित एसटीएफ में अब बैठने की दिक्कतें शुरू हो गई। मुख्यालय ने नए भवन की अनुमति दी और कहा कि फिलहाल किराये की इमारत देखें। बंगाली चौराहे पर एक मकान पसंद किया लेकिन अचानक 200 पेटी शराब पकड़ ली। मकान मालिक घबराते हुए पहुंचा और कहा कि मुझे माफ कर दो। मैं पुलिसवालों को मकान देने के पक्ष में नहीं हूं।

दिखावे की गश्त : एक महीने में 12 हत्या
तत्कालीन एसपी संजीव शमी ने रात 12 बजे थाना प्रभारियों को नियंत्रक कक्ष बुलाया तो पता चला साहब कांबिंग गश्त करवाते हैं। अफसर अब सात दिन पूर्व ही गश्त की तारीख और वार तय कर देते हैं। टीआइ आदेश की तामीली शिद्दत से करते हैं। रात को होने वाली गश्त के मुलजिम दोपहर को ही पकड़ लेते हैं। यही वजह है कि बड़े अपराधी हाथ नहीं आते। छोटे और पारंपरिक मुलजिमों के नाम-पते लिख कर आंकड़ों की खानापूर्ति कर लेते हैं। शायद यही कारण है कि पिछले एक माह में शहर में हत्या की 12 घटनाएं दर्ज हुई हैं। लूट-डकैती जैसे गंभीर मामलों के मुलजिमों तक न पुलिसकर्मी पहुंचे न अफसरों ने गौर फरमाया। लंदन विलाज डकैती कांड के आरोपित सोमला का किस्सा तो सभी को पता है।

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