हर साल नहीं आते थे लू के मरीज, लेकिन तापमान बढ़ने के कारण रोजाना 30 मरीज पहुंच रहे एमवाय अस्पताल

By Abhishek Raghuvanshi
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शासकीय अस्पताल के साथ ही निजी अस्पतालों और क्लिनिक पर भी मरीजों की संख्या बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहले निमाड़ क्षेत्र के मरीज हमारे पास लू के इलाज के लिए आते थे।

  • इस बार तापमान 44 डिग्री से अधिक पहुंच गया है।
  • निजी अस्पतालों और क्लिनिक पर भी मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
  • मरीजों में लू के साथ ही उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन की समस्या देखने को मिल रही है।

मालवा क्षेत्र इसलिए प्रसिध्द रहा है क्योंकि यहां का तापमान कम रहता था। यहां भले ही दिन का तापमान 42 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाए, लेकिन रात का तापमान हमेशा 20 से 22 डिग्री के बीच ही रहता था। जिससे क्षेत्र की अन्य क्षेत्रों की तुलना में जलवायु अधिक ठंडी हो जाती है। सुबह और शाम के समय ठंडी हवाएं चलती थी। लेकिन इस बार तापमान 44 डिग्री से अधिक पहुंच गया है, रात तक तापमान बढ़ा रहता है। पहले इंदौर में लू के मरीज सामने नहीं आते थे, क्योंकि तापमान कम रहता था। लेकिन इस वर्ष तापमान बढ़ने के कारण रोजाना करीब 30 मरीज एमवाय अस्पताल ओपीडी में पहुंच रहे हैं। शासकीय अस्पताल के साथ ही निजी अस्पतालों और क्लिनिक पर भी मरीजों की संख्या बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहले निमाड़ क्षेत्र के मरीज हमारे पास लू के इलाज के लिए आते थे। लेकिन इस बार इंदौर के मरीज हमारे पास इलाज करवाने के लिए आ रहे हैं। क्योंकि तापमान काफी बढ़ गया है। इन मरीजों में लू के साथ ही उल्टी, दस्त, डिहाइड्रेशन, घबराहट, जी मचलना जैसी समस्या भी देखने को मिल रही है। इनमें सबसे अधिक वह मरीज शामिल है, जिन्हें दोपहर के समय में बाहर घूमने का काम रहता है।
मेडिसिन विभाग ओपीडी में करीब 700 मरीज पहुंच रहे
इन दिनों मेडिसिन विभाग की ओपीडी में मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। आम दिनों में जहां 500 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, वहीं इन दिनों 600 से 700 मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं। मेडिसिन विभागाध्यक्ष डा. धमेंद्र झंवर ने बताया कि वर्तमान में करीब 600 से 700 मरीज आ रहे हैं। इनमें से पांच प्रतिशत उल्टी-दस्त, लू लगने, डिहाइड्रेशन, घबराहट व जी मचलना जैसी बीमारियों के मरीज आ रहे है। वहीं 20 प्रतिशत वायरल फीवर, सर्दी-खांसी, गले दर्द व बदन दर्द के आ रहे। दो प्रतिशत मरीज वायरल हेपेटाइटिस के आ रहे हैं।
समय पर पहचानें लक्षण
स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। जिसमें बताया कि लू (तापघात) के लक्षण दिखाई देते ही निकट के अस्पताल में संपर्क कर आवश्यक दवा का उपयोग सुनिश्चित करें। ग्रीष्म ऋतु में लू लगने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। वृद्ध, बच्चे, खिलाड़ी, धूप में काम करने वाले श्रमिक सर्वाधिक खतरे में रहते हैं। पसीना न आना, गर्म-लाल एवं शुष्क त्वचा, मतली, सिरदर्द, थकान, चक्कर आना, उल्टियां होना, बेहोश हो जाना एवं पुतलियां छोटी हो जाना लू के प्रमुख लक्षण एवं संकेत हैं।
अधिक मात्रा में पीएं पानी
गर्मी व लू से बचाव के लिए अधिक मात्रा में पानी पिएं। साथ ही खाली पेट न रहें, शराब व केफिन के सेवन से बचें, ठण्डे पानी से नहाएं, सर ढके व हल्के रंग के ढीले व पूरी बांह के कपड़े पहने, दोपहर 12 से शाम चार के मध्य बाहर जाने से बचें। यदि घर से बाहर निकलना आवश्यक हो तो छाता व धूप के चश्मे का उपयोग करें, धूप में निकलने से पहले कम से कम दो गिलास पानी अवश्य पिएं। ओआरएस का घोल, नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी, फलों का रस आदि का सेवन लाभदायक होता है।

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