करीब 1 साल पहले हुए बावडी हादसे में शहर के 36मासूम नागरिकों की मौत हुई थी ,, इस हादसे के बाद जिला प्रशासन और नगर निगम में ऐसी ही अन्य बावड़ियों की सुध लेने की बात कही थी जो कागजों में सीमेंट कर रह गई,,,
गुरुवार को वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी ने शहर के इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर मीडिया से चर्चा की,यह प्रेस वार्ता भी मल्हारगंज स्थित लाल अस्पताल प्रांगण की बावड़ी पर की गई ताकि वास्तविकता को बताया जा सके,, द्विवेदी ने बताया कि बावड़ी हादसे के बाद इस मामले को हाई कोर्ट ले जाया गया था जहां माननीय उच्च न्यायालय ने भी ऐसी सभी बावड़ियों की सुध लेने, इन पर जन भागीदारी और एनजीओ के माध्यम से पुनः सहजने की बात कही थी,, बावजूद इसके निगम के जिम्मेदार कुंभकरण नींद में सो रहे हैं,,
