28 अप्रैल से 4 मई तक होने वाली श्रीमद भागवत कथा करने के लिए इंदौर पहुंचे बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एचआरग्रीन होटल में पत्रकारवार्ता की। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों के द्वारा पूछे गई सनातन धर्म से जुढ़े कई सवालों के बेबाकी से जवाब दिये।
इंदौर आये बागेश्वर धाम के पीठाधिश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने पत्रकारवार्ता की शुरूआत में शिक्षा मुफ्त भारत और भिक्षा मुक्त भारत का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने इंदौर का कल्याण होने और पूरे मध्यप्रदेश समेत भारत वर्ष में नशा मुक्ति होने की कामना की। बीते कुछ समय से सनातन धर्म खतरे में है और यह साल शनि का साल है। न्याय के देवता शनि की इस साल में कितनी त्रीव्र दृष्टि होगी। अरविंद केजरीवाल सलाखों के पीछे है इनत माम सवालों के जवाब में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि हम सब बहुत ही अहिंसावादी लोग है और सोये हुए थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान का हिंदू जाग उठा है। जब लोगों ने देखा कि ग्रामीण अंचलों में भोले भाले लोगों का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है और रामचरित मानस को जलाया जा रहा है, तब लगा सनातन धर्म खतरे में है। उन्होंने कहा कि वर्तमान का युवा खतरे से बाहर निकल रहा है और धर्मविरोधी लोग भारत छोड़कर जा रहा है। राजनीति पर बोलने से इनकार करते हुए उन्होंने कम शब्दों में केवल इतना ही कहा कि सत्य की जीत हो और अन्याय करने वाले जेल में हो।
पत्रकारों से चर्चा में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने गुरूकुल अध्ययन पद्धति पर भी जोर दिया। उन्होंने भारत सरकार से मांग करते हुए कहा कि जागरूक भारतीय होने के नाते भारत को विश्वगुरू बनाना है, इसलिए गुरूकुल पद्धति को लागू करना होगा। उन्होंने कहा कि केजी से लेकर पांचवी तक संस्कार संस्कृति और संस्कृत के संरक्षण के लिए भारत सरकार गुरूकुल की पद्धति को लागू करती है और सरकारी मास्टरों व टीचर के बच्चों को सरकारी स्कूलों में ऐसी शिक्षा को अनिवार्य करती है तो भारत की शिक्षा व्यवस्था सुधर जाएगी।
हिंदू राष्ट्र को लेकर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि सनातन को लेकर युवाओं में जागृति आई है। उन्होंने कहा कि माता सीता, मां गंगा, रामजी और गौ माता पर टिप्पणी करने वाले लोगों के खिलाफ जिस दिन कठोर कानून बन जाएगा। उस दिन भारत हिंदू राष्ट्र का पर्याय होगा।
विश्व में बन रहे युद्ध जैसे हालात को लेकर उन्होंने कहा कि विश्व तनाव में है और विश्व में वर्चस्व की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि तमाम देशों को समझना होगा कि युद्ध किसी भी देश की महानता का उपाय नहीं है। महान बनने का उपाय विवाद नहीं केवल संवाद है। उन्होंने कहा कि जब तक अन्य देश इस बात को नहीं समझेंगे तब तक विश्वयुद्ध नहीं रूक सकता।
