बगैर अनुमति पेड़ काटने पर जुर्माना नहीं, सीधे होगी FIR, निगम कर रहा प्रारूप में बदलाव

By Abhishek Raghuvanshi
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पेड़ों को काटने से रोकने के लिए निगम प्रक्रिया को सख्त बनाएगा। पेड़ों को काटने की अनुमति अब आसानी से तो नहीं मिल पाएगी, वहीं इसके लिए शुल्क में भी कई गुना बढ़ोतरी की जाएगी।
पर्यावरण संरक्षण के लिए एक और नवाचार के लिए नगर निगम करेगा पेड़ो को लेकर नियमों में बदलाव
पेड़ काटने की अनुमति देने की प्रक्रिया होगी सख्त
शुल्क भी दस गुना बढ़ेगा

इंदौर। नवाचारों के लिए पहचाना जाने वाला इंदौर नगर निगम अब पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पेड़-पौधों को सुरक्षित रखने के लिए कड़े कदम उठाने जा रहा है। पेड़ों को काटने से रोकने के लिए निगम प्रक्रिया को सख्त बनाएगा। पेड़ों को काटने की अनुमति अब आसानी से तो नहीं मिल पाएगी, वहीं इसके लिए शुल्क में भी कई गुना बढ़ोतरी की जाएगी। अभी तक निर्धारित नियमों के अनुसार, कोई भी अपनी जमीन पर लगे पेड़ को काटने के लिए एक हजार रुपये की रसीद कटवाकर अनुमति प्राप्त कर सकता है। इसे 10 गुना बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है यानी अब एक हजार रुपये के स्थान पर 10 हजार रुपये शुल्क देना होगा। पेड़ काटने की अनुमति जारी करने से पहले निगम की टीम मौका-मुआयना भी करेगी। टीम को लगता है कि काटने के बजाय पेड़ को अन्यत्र ट्रांसप्लांट किया जा सकता है तो काटने की अनुमति देने के स्थान पर पेड़ों को ट्रांसप्लांट करवाया जाएगा। भू-स्वामी को इसके लिए निर्धारित खर्च उठाना होगा। ट्रांसप्लांट किए गए पेड़ की सेहत का ध्यान रखने की जिम्मेदारी नगर निगम की होगी। वहीं, बगैर अनुमति पेड़ काटने वालों पर सिर्फ जुर्माना नहीं लगेगा, उनके खिलाफ सीधे वृक्ष संरक्षण अधिनियम के प्रविधानों के तहत आपराधिक प्रकरण भी दर्ज करवाया जाएगा। अपराध सिद्ध होने पर दो वर्ष तक के कारावास का प्रविधान है। नगर निगम ने नियमों में बदलाव के लिए प्रारूप तैयार कर लिया है, जिसे राज्य शासन को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। उल्लेखनीय है कि इंदौर शहर में चार दशक पहले तक हरियाली का प्रतिशत 30 से ज्यादा था, जो वर्तमान में 9 प्रतिशत के आसपास रह गया है।

निगम सीमा में हैं नौ लाख, कभी इतने सिर्फ नौलखा क्षेत्र में थे
शहर में हरियाली किस तेजी से कम हुई है, यह इसी से समझा जा सकता है कि वर्तमान में नगर निगम सीमा में शासकीय और निजी जमीन पर पेड़ों की कुल संख्या नौ लाख के आसपास है। जबकि किसी समय अकेले नौलखा क्षेत्र में ही इतने पेड़ हुआ करते थे। नगर निगम क्षेत्र में पेड़ों की गिनती का काम चल रहा है। पर्यावरणविदों के अनुसार, ऑक्सीजन की आवश्यकता और कार्बन डाय ऑक्साइड के अवशोषण के हिसाब से एक व्यक्ति के लिए 8 से 10 पेड़ों की आवश्यकता होती है। शहर की जनसंख्या और घनत्व के हिसाब से यह संख्या करीब तीन करोड़ होती है।

नियम का स्वागत करेंगे
पेड़ों की कटाई रोकने के लिए उठाए जाने वाले हर कदम का स्वागत होना चाहिए। पेड़ों की कटाई के लिए दी जाने वाली अनुमति की प्रक्रिया को सख्त बनाने और अनुमति शुल्क में बढ़ोतरी का सुझाव अच्छा है। नगर निगम की तरफ से प्रस्ताव मिलता है तो हम इस पर सकारात्मक विचार करेंगे।

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कैलाश विजयवर्गीय, नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री प्रारूप तैयार है हमने प्रारूप तैयार कर लिया है। इसे जल्द ही शासन को भेजेंगे। पेड़ों की कटाई पर सख्ती जरूरी है। हमारा उद्देश्य शहर की हरियाली को बचाए रखना है। राजेंद्र राठौर, महापौर परिषद सदस्य जनसंख्या के हिसाब से चाहिए तीन करोड़ प्राकृतिक नियमों के हिसाब से एक व्यक्ति के लिए 8 से 10 पेड़ों की आवश्यकता होती है।

इस हिसाब से इंदौर में हमें कम से कम तीन करोड़ पेड़ चाहिए। वर्तमान संख्या इससे कई गुना कम है। डॉ. पीसी दुबे, पर्यावरणविद् पर्यावरण के हिसाब से इन पेड़ों का ज्यादा लाभ- कुसुम, आम, बरगद, पीपल, साजा, बीजा, तिन्सा, नीम, जामुन, अंजन, सिरस, महुआ, करंज

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