चुनाव के लिए भाजपा ने बनाई अधिवक्ताओं की फौज, समस्याएं सुलझाने के साथ, विरोधी दल की बढ़ाएंगे मुश्किलें

By Abhishek Raghuvanshi
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  • लोकसभा चुनाव में कानूनी उलझनों से निपटने के लिए भाजपा ने अधिवक्‍ताओं की टीम बनाई है।
  • लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा की तैयारी
  • कानूनी उलझनों से निपटने के लिए बनाई अधिवक्ताओं की टीम
  • विरोधी दल की गतिविधियों पर भी रखेंगे नजर

इंदौर। आजादी के पहले से देश की राजनीति में अधिवक्ता हमेशा ही प्रमुख भूमिका में रहे हैं। आजादी के बाद भी उनकी भूमिका बरकरार रही और आज भी है। यही वजह है कि इस बार भी भाजपा और कांग्रेस दोनों ने लोकसभा चुनाव के दौरान आने वाले कानूनी पेंच को सुलझाने के लिए अधिवक्ताओं की फौज अभी से तैनात कर दी है।दोनों ही पार्टियों ने बकायदा विधि प्रकोष्ठ गठित कर बहुत पहले से अधिवक्ताओं की नियुक्ति कर दी है अधिवक्ताओं से आचार संहिता लागू होने से लेकर अंतिम परिणाम घोषित होने तक मुस्तैद रहने के लिए कहा गया है। भाजपा ने तो अधिवक्ताओं के प्रशिक्षण के कई दौर हो भी चुके हैं।
विधि प्रकोष्ठ में शामिल वकील सिर्फ चुनाव के दौरान पार्टी के प्रत्याशियों के सामने आने वाली कानूनी मुश्किलों का रास्ता ही नहीं खोजेंगे, बल्कि वे यह सुझाव भी देंगे कि प्रतिद्वंद्वियों की राह में मुश्किलें कैसे बढ़ाई जा सकती हैं? वे इस” बात पर भी नजर रखेंगे कि प्रतिद्वंद्वी पार्टी के प्रत्याशी कहां कानूनी चूक कर रहे हैं और कैसे उन्हें कानूनी पेंच में फंसाया जा सकता है। सामने वाले पार्टी या प्रतिद्वंद्वी के चूक करते ही अधिवक्ता सामने वाले प्रत्याशी को घेरने के लिए रणनीति भी तैयार करेंगे।

पंपलेट्स, पोस्टर, बैनर सब पर रखेंगे नजर
अधिवक्ताओं की फौज का काम आचार संहिता लागू होते ही शुरू हो जाएगा। प्रत्याशियों के पंपलेट्स, पोस्टर इत्यादि भी उनके अनुमोदन के बाद ही प्रकाशित करवाए जाएंगे। ऐसा इसलिए ताकि प्रकाशित करवाई जा रही सामग्री में कोई ऐसी बात न छप जाए जो पार्टी या प्रत्याशी के लिए कानूनी उलझन खड़ी करे। ये अधिवक्ता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के भाषणों का भी विश्लेषण करेंगे।

विधि प्रकोष्ठ में अधिवक्ताओं की नियुक्ति करने में भाजपा ने कांग्रेस से बाजी मार ली है। भाजपा विधि प्रकोष्ठ प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता मनोज द्विवेदी के अनुसार पार्टी ने विधि प्रकोष्ठ के तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक संयोजक और दो सह संयोजकों की नियुक्ति की है। इसके अलावा अलग-अलग पदों पर वकीलों की नियुक्ति भी की गई है।
इन सभी अधिवक्ताओं को आचार संहिता उल्लंघन के मामले, पुलिस और प्रशासन से जुड़े मामलों में मैदान में उतारना है। जिला स्तर पर एक मीडिया इंचार्ज और पांच सदस्यीय समिति अलग से बनाई गई है। संभाग स्तर पर भी वकीलों की एक टीम बनाई गई है।

पार्टियों के विधि प्रकोष्ठों ने बनाए वार रूम
भाजपा, कांग्रेस ने विधि प्रकोष्ठ गठित करने के साथ-साथ वार रूम भी बनाए हैं। भाजपा के इंदौर कार्यालय में विशेष वार रूम तैयार किया गया है। विधि प्रकोष्ठ में शामिल अधिवक्ता अनुमतियां लेने, निर्वाचन आयोग से समन्वय स्थापित करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य करेंगे।

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ये जिम्मेदारी होगी अधिवक्ताओं के पास

  • आचार संहिता के दौरान होने वाली शिकायतों में पैरवी करना और नोटिस का जवाब देना।
  • दूसरे पार्टी के प्रत्याशी द्वारा आचार संहिता के किसी भी प्रकार के उल्लंघन पर तुरंत नोटिस की कार्रवाई करना, निर्वाचन आयोग के समक्ष उपस्थित होकर प्रकरण दर्ज कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना।
  • इंटरनेट मीडिया पर सतत निगरानी, किसी भी तरह का उल्लंघन होने पर तुरंत कार्रवाई करना।
  • प्रत्याशियों को फार्म भरने की प्रक्रिया बताना और पार्टी के प्रत्याशी का सफल नामांकन जमा कराना।
  • प्रत्याशियों का आपराधिक रिकार्ड एकत्रित करना और चुनाव आयोग को सौंपना, पार्टी की वेबसाइट पर डालना।
  • पार्टी द्वारा तैयार विज्ञापन, प्रचार सामग्री इत्यादि की बारीकी से जांच करना और इसके कानूनी पहलू पर सुझाव देना, आवश्यकतानुसार संशोधन करवाना।
  • हमारे पास अधिवक्ताओं की टीम तैयार है। आचार संहिता लागू होते ही हम काम शुरू कर देंगे। अधिवक्ताओं के प्रशिक्षण के कई सत्र आयोजित किए जा चुके हैं। -एडवोकेट मनोज द्विवेदी प्रदेशाध्यक्ष, भाजपा विधि प्रकोष्ठ
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