गुजरात राज्य के “जिला बाल सुरक्षा इकाई (डीसीपीयू) के सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए बच्चों की साइबर सुरक्षा विषय पर आयोजित ऑनलाइन वेबिनार

By Abhishek Raghuvanshi
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गुजरात राज्य के “जिला बाल सुरक्षा इकाई (डीसीपीयू) के सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए बच्चों की साइबर सुरक्षा विषय पर आयोजित ऑनलाइन वेबिनार में, इंदौर पुलिस के एडिशनल डीसीपी क्राइम ने भी, सिखाई उन्हें बच्चों से जुड़े साइबर अपराधों की बारीकियां।

★ राष्ट्रीय जन सहयोग एवं बाल विकास संस्थान (निपसिड) पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र, इंदौर के द्वारा आयोजित किया गया था, गुजरात राज्य के “जिला बाल सुरक्षा इकाई (डीसीपीयू) के सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए बच्चों की साइबर सुरक्षा विषय पर ऑनलाइन ओरिएंटशन कार्यक्रम”।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत कार्यरत स्वायत्तशासी संस्थान- राष्ट्रीय जन सहयोग एवं बाल विकास संस्थान (निपसिड) है, जिसके द्वारा महिलाओं एवं बच्चों के विकास के क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण, शोध, कार्यशाला आदि का आयोजन किया जाता है।
इसी कड़ी में इसके इंदौर स्थित पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र क्षेत्रान्तर्गत आने वाले गुजरात राज्य के “जिला बाल सुरक्षा इकाई (डीसीपीयू) के सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए बच्चों की साइबर सुरक्षा विषय पर ऑनलाइन अभिमुखीकरण कार्यक्रम” का आयोजन 28 व 29′ मई, 2024 को किया गया।

विदित हो कि पुलिस कमिश्नर नगरीय इंदौर श्री राकेश गुप्ता के दिशा निर्देशन में इंदौर पुलिस द्वारा समाज मे साइबर अपराधों से सुरक्षा हेतु लगातार जागरूकता कार्यक्रम का अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत अनवरत रूप से साइबर अवेयरनेस की कार्यशालाएं, स्कूल/कॉलेज व संस्थानों में आयोजित की जा रही है।
इसी तारतम्य में राष्ट्रीय जन सहयोग एवं बाल विकास संस्थान (निपसिड) पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र इंदौर द्वारा आज 29.05.24 को गूगल मीट पर आयोजित उक्त ऑनलाइन वेबिनार में अतिथि व्याख्याता के रूप में इंदौर पुलिस की ओर से एडिशनल डीसीपी श्री राजेश दंडोतिया द्वारा प्रतिभागी सामाजिक कार्यकर्ताओं को साइबर अपराधों की बारीकियों के बारे में बताते हुए, इनसे बच्चों की सुरक्षा कैसे की जाए और डिजिटल के इस युग मे कैसे उन्हें इसके जाल में फसने से बचाया जाए, चर्चा की।
उन्होंने सभी को बताया कि, सतर्क और जागरूक रहकर ही, इनसे बचा जा सकता है। अतः हम बच्चों को डिजिटल रूप से इतना सक्षम व साक्षर व जागरूक बनाएं, कि वो इन साइबर क्राइम के खतरों को पहचान कर उनका समाधान कर सके।

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