इंदौर शहर में न्याय नगर की कृष्णबाग कॉलोनी में पिछले दिनों प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाया था। इसके बाद कुछ लोगों को अगस्त के पहले हफ्ते तक मकान खाली करने का समय दिया था। उधर अब 16 रहवासियों के मकानों पर कार्रवाई के लिए प्रशासन स्वतंत्र हो गया है। कृष्णबाग कॉलोनी में अवैध निर्माण का है मामला।
प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ लिया था स्टे।
कोर्ट में कोई भी डॉक्यूमेट पेश नहीं कर पाए।
इंदौर। न्याय नगर की कृष्णबाग कॉलोनी मामले में रहवासियों की परेशानी बढ़ गई है। 16 रहवासियों ने अपने आशियाने बचाने की खातिर प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। 24 जून 2024 को इनकी सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की एकल पीठ ने प्रशासन की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। बिल्डर ने इस आदेश को चुनौती दी और अपील दायर कर दी। इस अपील को स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट की युगलपीठ ने एकलपीठ के स्टे आदेश को निरस्त कर दिया। अब प्रशासन इन 16 रहवासियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए स्वतंत्र हो गया है। मामले में कुछ और याचिकाएं अभी लंबित हैं।
16 रहवासियों ने स्टे ले लिया था
गौरतलब है कि प्रशासन ने पिछले दिनों कृष्णबाग कॉलोनी में अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई की थी। न्याय नगर के 16 रहवासियों ने प्रशासन की कार्रवाई को गलत बताते हुए याचिका दायर कर स्टे ले लिया था। अपीलार्थी मे. श्रीराम बिल्डर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वीके जैन और पद्मनाभ सक्सेना ने पैरवी की। सोमवार को युगलपीठ ने इस मामले में विस्तृत फैसला जारी किया।
16 में से कोई भी नक्शा प्रस्तुत नहीं कर पाया
कोर्ट ने कहा कि जिन 16 लोगों की याचिका पर एकल पीठ ने स्टे दिया था उनमें से 10 लोगों के पास सिर्फ विक्रय अनुबंध है रजिस्ट्री नहीं। तीन लोगों के पास रजिस्ट्री तो है, लेकिन ये रजिस्ट्रियां श्रीराम बिल्डर ने नहीं बल्कि किसी अन्य ने उनके पक्ष में की थी।
इसी तरह तीन लोगों ने अपने पक्ष में कोई दस्तावेज ही प्रस्तुत नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि 16 लोगों में से कोई भी भवन अनुज्ञा और नगर निगम से स्वीकृत नक्शा प्रस्तुत नहीं कर सका है।
