इंदौर के एमवाय अस्पताल में पुरुष रोगियों के लिए सिर्फ 300 बिस्तरों की सुविधा

By Abhishek Raghuvanshi
3 Min Read
  • बिस्तर की सुविधा नहीं होने से अनेक पुरुष रोगियों को मजबूरन निजी अस्पताल में ही इलाज के लिए जाना पड़ता है।
  • जिला अस्पताल में भी पुरुषों के इलाज के लिए 40 बिस्तरों की सुविधा थी, लेकिन अब नहीं है।
  • पीसी सेठी, एमटीएच आदि अस्पतालों में केवल महिलाओं और बच्चों के लिए सुविधा।
  • सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में आम मरीजों का भर्ती होना आसान नहीं है।

इंदौर। मध्य प्रदेश के सबसे अधिक जनसंख्या वाले शहर में शासकीय स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन उनका फोकस महिलाओं और बच्चों पर ही नजर आता है। शहर में पुरुषों की आबादी दस लाख के करीब है, लेकिन महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के अधीनस्थ एमवाय अस्पताल ही एकमात्र शासकीय अस्पताल है। वहां भी पुरुष रोगियों के उपचार के लिए मात्र 300 बिस्तरों की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे में अनेक पुरुषों को मजबूरन निजी अस्पताल में ही इलाज के लिए जाना पड़ता है।

उल्लेखनीय है कि जिला अस्पताल में भी पुरुषों के इलाज के लिए 40 बिस्तरों की सुविधा थी, लेकिन अब नहीं है। शहर में इसके अलावा पीसी सेठी, एमटीएच आदि अस्पताल भी हैं, लेकिन वहां सिर्फ महिलाओं और बच्चों के इलाज की सुविधा है। यह व्यवस्था जिम्मेदारों को भी नजर आती है, लेकिन इसके बाद भी कोई ध्यान नहीं देते हैं। हालांकि जिला अस्पताल में पुरुष वार्ड बनाने की योजना है, लेकिन वर्षों से इसका निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। स्वास्थ्य विभाग के बाणगंगा स्थित अस्पताल की प्रभारी सुनीता यादव का कहना है कि हमारे पास स्टाफ की कमी है। साथ ही महिलाओं के प्रसूति के मामले भी बड़ी संख्या में होती है। इस कारण से हम पुरुष रोगियों को भर्ती नहीं कर पाते हैं।

अभी एमवाय में 800 बिस्तर
बता दें कि वर्तमान में एमवाय अस्पताल में 800 बिस्तरों की सुविधा है। इसमें से 300 पुरुषों के लिए और शेष बच्चों और महिलाओं के लिए हैं। अस्पताल में छठी मंजिल पर 120 बिस्तर भी बनकर तैयार हो रहे हैं। इसके बाद यहां बिस्तरों की संख्या 900 से भी अधिक हो जाएगी।

सुपर स्पेशिएलिटी में आसान नहीं भर्ती होना
वहीं एमजीएम के अधीन सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में भी पुरुषों के भर्ती होने की सुविधा है, लेकिन इस अस्पताल में आम मरीजों का भर्ती होना आसान नहीं है। इसके कारण हमेशा मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जानकारी के अनुसार यहां दोपहर तीन बजे के बाद मरीजों को अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

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