अजब मध्य प्रदेश के गजब सरकारी स्कूल, जी हां जब बच्चों के लिए छत ही नसीब ना हो और खुले आसमान के नीचे पढ़ाने को मजबूरन तो यही टैगलाइन याद आती है..?मध्य प्रदेश में दम तोड़ रही शिक्षा व्यवस्था झोपड़ी में पढ़ने को मजबूर भारत का भविष्य,मध्य प्रदेश में शिक्षा का हाल बदहाल है।आलम ऐसा है कि यहां पर पढ़ने और पढ़ाने वाले दोनों मौजूद हैं। लेकिन स्कूल चलाने के लिए न कोई इमरात हैं ना कोई सुविधा ऐसे में सवाल उठता है कि अगर प्रदेश में शिक्षा का स्तर ऐसा रहेगा तो देश का भविष्य कहे जाने वाले बच्चों का खुद का भविष्य कैसे उज्ज्वल होगा।मिडिया की टीम जब इस बात का ज़याज़ा लेने के लिए विदिशा जिलें के लटेरी ब्लॉक में सरकार के वादों की हकीकत जानने पहुंची.तो लटेरी ब्लॉक के शहरी क्षेत्र के वॉर्ड 2 सहरिया बस्ती मोहनपुरा एक आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र हैं.कहने को तो सरकारें आदिवासियों के विकास की खूब बात करती हैं लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके ठीक उलट है.यहां पर चल रहें स्कूलों के पास अपना भवन ही नहीं है तो क्षेत्र में बच्चें झोपड़ीनुमा स्कूल में पढ़ने को मजबूर हैं।
