पुलिस, प्रशासन व आबकारी के पास पुख्ता प्लान ही नहीं:तीन महीने के अपराध खंगाले तो पता चला नशाखोर वाहन चालक, जिलाबदर व जेल से छूटे बदमाश ही कर रहे वारदात

By Abhishek Raghuvanshi
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पुलिस, प्रशासन व आबकारी के पास पुख्ता प्लान ही नहीं:तीन महीने के अपराध खंगाले तो पता चला नशाखोर वाहन चालक, जिलाबदर व जेल से छूटे बदमाश ही कर रहे वारदात
शहर में वीकेंड पर अपराध ज्यादा होते हैं। इसे रोकने के लिए पुलिस, प्रशासन और आबकारी विभाग के पास कोई पुख्ता प्लान नहीं है। यही वजह है कि अपराधी बेखौफ हैं, क्योंकि पुलिस की सख्ती नजर नहीं आती। देर रात तक शहर के ढाबों और पब एंड बार में नशाखोरी चलती है। फिर यही लोग नशे में वाहन लेकर तेज रफ्तार में यमदूत बनकर दौड़ते हैं। वहीं, पुलिस जवान चेकिंग के नाम पर तीन सवारी, लाइसेंस ही चेक करते हैं।
तीन महीने में हुए 226 सड़क हादसों में 19 लोग जान गंवा चुके हैं, वहीं 207 लोग गंभीर रूप से घायल होकर लाचारी का जीवन जीने पर मजबूर हैं। भास्कर टीम ने वीकेंड पर होने वाले अपराधों को लेकर तीन महीने में हुए अपराधों का विश्लेषण किया। इसमें पता चला कि नशाखोर वाहन चालक, जिलाबदर और जेल से छूटे बदमाशों ने ही वारदातें की हैं। इन पर नियंत्रण के लिए सक्रिय तीनों विभागों की स्थिति चिंताजनक है।
कुछ ही चौराहों पर दिखती है पुलिस, कॉम्बिंग गश्त का असर चिह्नित बदमाशों पर ही
03 महीने में 226 हादसे
19 लोग गंवा चुके जान
207 लोग लाचारी का जीवन जी रहे
भीड़ भरे स्थानों की सुरक्षा बीट के 2 जवानों के भरोसे छोड़ दी
वीकेंड पर कई स्पॉट भीड़ से भरे रहते हैं। जैसे स्कीम-140 चौपाटी, विजय नगर, ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर क्षेत्र की चौपाटी, स्कॉय लक्जरिया मॉल स्थित पब एंड बार, निरंजनपुर चौपाटी, मंगल सिटी मॉल चौपाटी, गांधी नगर चौपाटी। इसके अलावा अन्नपूर्णा क्षेत्र में 57 दुकान जैसे कुछ ऐसे स्थान हैं, जहां लोग परिवार के साथ पहुंचते हैं। ऐसे स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था बीट के 2 जवानों के भरोसे रहती है।
बार और पब का ऑनलाइन चेकिंग सिस्टम भी हो गया फेल
पब, बार, ढाबों पर होने वाली नशे की पार्टियों पर नियंत्रण रखने आबकारी विभाग भी सख्त कदम उठाता नहीं दिखता। विभाग ने हाल ही में पबों की ऑनलाइन चेकिंग का सिस्टम शुरू किया है। इसके बाद भी शनिवार-रविवार रात 12 बजे बाद तक कई पब एंड बार खुले रहते हैं। बड़े पब एंड बारों में होने वाली पार्टियों के लिए विभाग के अफसरों का संरक्षण रहता है। आबकारी अफसरों की फील्ड में कभी भी उपस्थिति नहीं दिखी।
अफसर नहीं तो जवान भी गायब रहते चौराहों से
वीकेंड में सड़कों पर न तो थाना प्रभारी नजर आते हैं न ही पुलिस की चेकिंग दिखती है, न ही जवान दिखाई देते हैं। चेकिंग होती भी है तो विजय नगर, निरंजनपुर, पलासिया, रीगल और कनाड़िया कुछ चुनिंदा चौराहे पर। ये भी एक-डेढ़ घंटे से ज्यादा नहीं चलती। लंबे समय से इन तय चौराहों पर ही चेकिंग होने से नशाखोर और बदमाश भी वाकिफ हैं, इसलिए वे अलग रास्ते तलाश लेते हैं और पुलिस के हाथ नहीं आते।
नशाखोरी रोकने ढाबों पर भी निगरानी नहीं
बायपास स्थित ढाबों और फार्म हाउस पर नशाखोरी के साथ ड्रग्स पार्टियां होती हैं, लेकिन न तो संबंधित थाने की पुलिस को इसकी भनक लगती है न ही आबकारी विभाग को। ढाबों पर तो टेबलों पर ही शराब का सेवन बिना परमिट के बीट के जवानों की मदद से करवा दिया जाता है।
चेकिंग सिस्टम को बदलने के निर्देश
बदमाशों और नशाखोरों पर नियंत्रण के लिए कॉम्बिंग गश्त करवाई जाती है। ये सही है कि कुछ चौराहों पर हर शनिवार-रविवार फिक्स चेकिंग पॉइंट रहते हैं। इसे बदलकर आकस्मिक रात्रि चेकिंग प्रमुख मार्गों और चौराहों पर करवाने की व्यवस्था जल्द शुरू करेंगे।

  • अमित सिंह, एडिशनल कमिश्नर
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