महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार ने 30 सितंबर को हुई कैबिनेट बैठक में देशी गाय को ‘राज्यमाता’ का दर्जा देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। यह कदम उठाने वाला महाराष्ट्र देश का पहला राज्य बन गया है। इस फैसले का उद्देश्य देशी गाय के सामाजिक, धार्मिक, और कृषि महत्व को सम्मान देना है।
राज्य सरकार की अधिसूचना में कहा गया कि देशी गाय का दूध पोषण का महत्वपूर्ण स्रोत है, आयुर्वेदिक चिकित्सा और पंचगव्य उपचार में इसका व्यापक उपयोग होता है, और जैविक खेती में इसके गोबर से बनी खाद का महत्वपूर्ण योगदान है।
गायों को ‘राज्यमाता’ का दर्जा देकर सरकार ने उनकी भारतीय समाज में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भूमिका को भी रेखांकित किया है। इसके साथ ही, यह निर्णय जैविक खेती को प्रोत्साहन देने और कृषि में पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
महाराष्ट्र सरकार ने देशी गायों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को मान्यता देते हुए उन्हें ‘राज्यमाता-गोमाता’ का दर्जा दिया है। राज्य के कृषि, डेरी विकास, पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि यह फैसला गायों के पोषण, कृषि और औषधीय महत्व को ध्यान में रखकर लिया गया है।
