मोरक्को में 7.2 तीव्रता का भूकंप, 296 की मौतें:कई इमारतें ढहीं; ये इस इलाके में आया 120 साल का सबसे ताकतवर भूकंप

By Abhishek Raghuvanshi
3 Min Read
भूकंप के बाद माराकेश शहर में मलबे में दबे में लोगों को निकाला गया है।

अफ्रीकी देश मोरक्को में भूकंप से अब तक 296 लोगों की मौत हो चुकी है। 153 लोग जख्मी हो गए हैं। मोरक्को जियोलॉजिकल सेंटर ने बताया कि भूकंप की तीव्रता 7.2 थी। यह शुक्रवार की देर रात आया। हालांकि, US जियोलॉजिकल सर्वे ने इसकी तीव्रता 6.8 बताई है। कहा है कि ये इस इलाके में 120 साल में आया सबसे ताकतवर भूकंप है।

मोरक्को के स्टेट टेलीविजन ने बताया कि भूकंप की वजह से कई इमारतें ढह गईं हैं। सोशल मीडिया पर भूकंप से जुड़े कई वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें लोग भागते हुए नजर आ रहे हैं।

भूकंप का एपिसेंटर एटलस पर्वत के पास इघिल नाम का गांव बताया जा रहा है, जो माराकेश शहर 70 किलोमीटर की दूरी पर है। भूकंप की गहराई जमीन से 18.5 किलोमीटर नीचे थी। पुर्तगाल और अल्जीरिया तक भूकंप के झटके महसूस किए गए।

तस्वीर माराकेश शहर की है। इसमें इमारत गिरते देखी जा सकती है।

भूकंप से इमारतें मलबे और धूल में तब्दील हो गईं। UNESCO की विश्व धरोहर स्थल ऐतिहासिक माराकेच में पर्यटकों का ध्यान खींचने वाली लाल दीवारों के कुछ हिस्से भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। US जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, उत्तरी अफ्रीका में भूकंप काफी दुर्लभ है। इससे पहले 1960 में अगादिर के पास 5.8 तीव्रता का भूकंप आया था। तब हजारों लोगों की मौत हो गई थी।

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फोटोज में देखिए तबाही….

यह माराकेश शहर की मस्जिद है। भूकंप के झटके से तबाह हो गई।
माराकेश शहर में भूकंप के कारण गिरे एक मकान के मलबे में दबी कार।
तस्वीर कासाब्लांका शहर की है। भूकंप के तेज झटकों के बाद लोग घरों से बाहर निकल आए।
कासाब्लांका शहर में कई लोग पूरी रात सड़क पर बैठे रहे। कइयों के घर तबाह हो गए।
यह तस्वीर राजधानी रबात की है। यहां भी लोगों ने पूरी रात सड़क पर गुजारी।
मारकेश में एक बिल्डिंग को नुकसान हुआ।

जाने भूकंप कैसे आता है?
हमारी धरती की सतह मुख्य तौर पर 7 बड़ी और कई छोटी-छोटी टेक्टोनिक प्लेट्स से मिलकर बनी है। ये प्लेट्स लगातार तैरती रहती हैं और कई बार आपस में टकरा जाती हैं। टकराने से कई बार प्लेट्स के कोने मुड़ जाते हैं और ज्‍यादा दबाव पड़ने पर ये प्‍लेट्स टूटने लगती हैं। ऐसे में नीचे से निकली ऊर्जा बाहर की ओर निकलने का रास्‍ता खोजती है और इस डिस्‍टर्बेंस के बाद भूकंप आता है। इससे जमीन में फॉल्ट लाइन्स बनती हैं।

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