देशभर में 500 नो किड्स जोन बंद करने की मांग:शांति देने के इरादे से कैफे-रेस्त्रां में बच्चों पर पाबंदी, इससे लोग बच्चे नहीं पैदा कर रहे

By Abhishek Raghuvanshi
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दक्षिण कोरिया दुनिया की सबसे कम जन्म दर वाला देश है। सरकार महिलाओं को अधिक बच्चों के लिए प्रोत्साहित करने के लिए 16 सालों में 16 लाख करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है, लेकिन हाल के सालों में ‘नो-किड्स जोन’ तेजी से लोकप्रिय हो गए हैं। इसका उद्देश्य वयस्कों को शांत माहौल देना है। अकेले जेजू द्वीप पर 80 ऐसे क्षेत्र हैं, जहां कैफे-रेस्त्रां आदि में बच्चों के प्रवेश पर पाबंदी है।

देशभर में ऐसे जोन की संख्या 500 से अधिक है। हैंकूक रिसर्च के सर्वे के मुताबिक 2021 में 10 में से 7 लोग ऐसे जोन के पक्ष में थे, लेकिन ऐसे संकेत हैं कि राय बदल रही है। हाल के दिनों में बेसिक इनकम पार्टी की सदस्य और मां योंग हाई-इन की बदौलत ऐसे जोन के खिलाफ विरोध में तेजी आई है। योंग हाल ही में नेशनल असेंबली की बैठक में दो साल के बच्चे के साथ पहुंचीं, जहां बच्चों को अनुमति नहीं है।

उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ रोजमर्रा की जिंदगी आसान नहीं है। हमारे समाज को ऐसे समाज के रूप में पुनर्जन्म लेना चाहिए जहां बच्चे भी हों। जेजू द्वीप के ऐसे जोन को अवैध करार देने के उद्देश्य से संसद में बिल पर बहस हो रही है। ऐसे जोन को संविधान की भावना के विपरीत बताया जा रहा है।

2012 में शुरू हुआ ‘नो किड्स जोन’
कोरियाई संस्कृति की विशेषज्ञ प्रोफेसर बोनी टिलैंड कहती हैं कि ‘नो किड्स जोन’ की शुरुआत 2012 की एक घटना से हुई, जिसमें एक रेस्तरां में एक बच्चा झुलस गया। इस घटना ने हलचल मचा दी, जब बच्चे की मां ने रेस्त्रां को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, कैमरे के फुटेज आने के बाद जनता का मूड बदलना शुरू हो गया, जिसमें हादसे से पहले बच्चा इधर-उधर भाग रहा था।

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कई लोग बच्चे पर लगाम न लगाने के लिए मां को दोषी ठहराने लगे। कोरिया में पहले से ही ‘मॉम-चूंग’ जैसे अपमानित शब्द उन महिलाओं के लिए हैं, जो दूसरों की उपेक्षा करके सिर्फ अपने बच्चों की परवाह करती हैं। इसके बाद नो किड्स जोन की बाढ़ आ गई। इसने लोगों को बच्चे पैदा न करने के लिए प्रोत्साहित किया। यहां शांति के हक को इस कदर स्वीकारा गया है कि माता-पिता भी इन क्षेत्रों को सही मानते हैं। 2 साल के बच्चे की मां ली यी कहती हैं- ऐसे माता-पिता को ढूंढ़ना मुश्किल नहीं है जो बच्चों पर नियंत्रण नहीं रखते, जिससे दूसरों को दिक्कत होती है।

नो रैपर्स, नो-यूट्यूबर और यहां तक कि नो प्रोफेसर जोन बन रहे
अब यहां ‘नो-टीनएजर जोन’ और ‘नो-सीनियर जोन’ भी बन रहे हैं। बड़ी संख्या में ‘नो-मिडिल-एज जोन’ भी बन गए हैं। सियोल में एक रेस्तरां 49 साल से ज्यादा उम्र के लोगों पर पाबंदी लगाने के बाद लोकप्रिय हो गया। उसका तर्क है कि इस उम्र के पुरुष महिला कर्मचारियों को परेशान कर सकते हैं।

ऐसे ही एक रेस्त्रां ने शोर और शराब के सेवन को कम से कम रखने की इच्छा का हवाला देते हुए 20-30 साल की महिलाओं को प्राथमिकता दी। कुछ रेस्त्रां ने ‘नो-रैपर जोन’, ‘नो-यूट्यूबर जोन’ और यहां तक कि ‘नो-प्रोफेसर जोन’ भी घोषित किया है।

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