चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने ताइवान के ईदगिर्द इलाकों में सैन्य अभ्यास के तीसरे दिन लाइव गोला-बारूद का इस्तेमाल किया। PLA ईस्टर्न थिएटर कमांड ने एक बयान में कहा- हमारे फाइटर जेट्स ने ताइवान के सलेक्टेड टारगेट्स पर गोला-बारूद से हमला किया है। इस मिलिट्री एक्सरसाइज में शेनडोंग वॉरशिप भी शामिल है।
इसी बीच साउथ चाइना सी में अमेरिकी नेवी का पोत दिखाई दिया। साउथ चाइना सी के जिस इलाके में ये पोत दिखा है उस पर चीन अपना दावा करता है। US नेवी ने बताया कि USS मीलियस वहां रेगुलर पेट्रोलिंग कर रहा है। पोत ‘फ्रीडम ऑफ नेविगेशन’ ऑपरेशन के तहत विवादित स्प्रैटली आईलैंड के पास से गुजरा है। वहीं, चीन का कहना है कि USS मीलियस ने अवैध रूप से साउथ चाइना सी में घुसपैठ की है।
अमेरिका बोला चीन की हरकतों पर हमारी नजर
चीन के इस तरह से ताइवान के पास युद्धाभ्यास करने पर अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता ने कहा था कि वो चीन की हरकतों पर नजर बनाए हुए हैं। अमेरिका के पास इलाके में शांति बनाए रखने के लिए उचित संसाधन हैं। हम अपने नेशनल सिक्योरिटी के वादों को पूरा करने में सक्षम हैं।
ताइवान के पास 4 इलाकों में हो रही ड्रिल
चीन ने 8 अप्रैल को फुजियान प्रांत के पिंगटन आईलैंड के पास 4 इलाकों में मिलिट्री ड्रिल शुरू की थी। ये इलाका ताइवान के काफी करीब है। ड्रिल के तीसरे दिन ताइवान की डिफेंस मिनिस्ट्री ने कहा कि पिंगटन आईलैंड के इलाके में चीन के 11 वॉरशिप और 59 फाइटर जेट्स दिखाई दिए हैं। चीन ने ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग वेन की अमेरिका विजिट के बाद ये सैन्य अभ्यास किया है।
पूरे ऑपरेशन को यूनाइटेड शार्प सोर्ड नाम दिया गया
चीन ने इस अभ्यास को ‘यूनाइटेड शार्प सोर्ड’ नाम दिया है। ये मिलिट्री ड्रिल ताइवानी तट से सिर्फ 50 किमी दूर की जा रही है। चीन पहले यह ड्रिल ताइवान से करीब 100 किमी दूर करता था, लेकिन साई इंग वेन के अमेरिका दौरे के बाद अब बेहद नजदीक पहुंच गया है।
ताइवान के मुताबिक, ड्रिल के पहले दिन (8 अप्रैल को) पिंगटन आईलैंड के इलाके में चीन के 8 वॉरशिप और 42 फाइटर जेट्स दिखाई दिए थे। दूसरे दिन (9 अप्रैल को) चीन ने 71 फाइटर जेट्स और 45 वॉर प्लेन से घेर लिया था। वहीं, अभ्यास शुरू होने से पहले यानी 7 अप्रैल को ही चीन ने अपने 2 लड़ाकू विमान और शेनडोंग समेत 3 वॉरशिप ताइवान के पास तैनात कर दिए थे।
चीन के सैन्य अभ्यास की तस्वीरें देखें…
ग्लोबल सप्लाई चेन पर होगा असर
चीन ताइवान के आस-पास समुद्र में मिलिट्री ड्रिल कर रहा है। ये इलाका काफी बिजी शिपिंग रूट है। इसी रास्ते से सेमीकंडक्टर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट्स दुनियाभर में भेजे जाते हैं। नैचुरल गैस सप्लाई के लिए भी ये सी-रूट महत्वपूर्ण है। दुनिया के लगभग आधे कंटेनर शिप इसी रास्ते से निकलते हैं। ऐसे में चीन के यहां मिलिट्री एक्सरसाइज करने से शिप्स को आने-जाने से रोका जा सकता है।
नैंसी पेलोसी की ताइवान विजिट के बाद भी चीन ने मिलिट्री ड्रिल की थी
2 अगस्त को पूर्व अमेरिकी संसद स्पीकर नैंसी पेलोसी ने ताइवान का दौरा किया था। इससे नाराज चीन ने 4 अगस्त को ताइवान के उत्तरी, दक्षिण-पश्चिमी और दक्षिण-पूर्वी इलाकों में मिलिट्री ड्रिल की थी। नैंसी पेलोसी की ताइवान विजिट को लेकर US और चीन के बीच तनाव बना हुआ था। चीन अमेरिका को धमकी दे रहा था। वो नहीं चाहता था कि पेलोसी ताइवान का दौरा करें।
चीन ने कहा था कि अगर पेलोसी का प्लेन ताइवान की तरफ गया तो वो उस पर हमला कर देगा। इस धमकी के बाद अमेरिकी नेवी और एयरफोर्स के 24 एडवांस्ड फाइटर जेट्स ने नैंसी के प्लेन को एस्कॉर्ट किया था।
अमेरिका-चीन के रिश्तों में ताइवान सबसे बड़ा फ्लैश पॉइंट
अमेरिका ने 1979 में चीन के साथ रिश्ते बहाल किए और ताइवान के साथ अपने डिप्लोमैटिक रिश्ते तोड़ लिए। हालांकि चीन के ऐतराज के बावजूद अमेरिका ताइवान को हथियारों की सप्लाई करता रहा। अमेरिका भी दशकों से वन चाइना पॉलिसी का समर्थन करता है, लेकिन ताइवान के मुद्दे पर अस्पष्ट नीति अपनाता है।
राष्ट्रपति जो बाइडेन फिलहाल इस पॉलिसी से बाहर जाते दिख रहे हैं। उन्होंने कई मौकों पर कहा है कि अगर ताइवान पर चीन हमला करता है तो अमेरिका उसके बचाव में उतरेगा। बाइडेन ने हथियारों की बिक्री जारी रखते हुए अमेरिकी अधिकारियों का ताइवान से मेल-जोल बढ़ा दिया।
इसका असर ये हुआ कि चीन ने ताइवान के हवाई और जलीय क्षेत्र में अपनी घुसपैठ आक्रामक कर दी है। NYT में अमेरिकी विश्लेषकों के आधार पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक चीन की सैन्य क्षमता इस हद तक बढ़ गई है कि ताइवान की रक्षा में अमेरिकी जीत की अब कोई गारंटी नहीं है। चीन के पास अब दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना है और अमेरिका वहां सीमित जहाज ही भेज सकता है।
अगर चीन ने ताइवान पर कब्जा कर लिया तो पश्चिमी प्रशांत महासागर में अपना दबदबा दिखाने लगेगा। इससे गुआम और हवाई द्वीपों पर मौजूद अमेरिका के मिलिट्री बेस को भी खतरा हो सकता है।
