दिग्विजय सिंह गुट का पलड़ा भारी, सुरजीत सिंह चड्ढा बने शहर कांग्रेस अध्यक्ष

By Abhishek Raghuvanshi
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. इंदौर शहर कांग्रेस को करीब साढ़े पांच महीने बाद अपना नया शहराध्यक्ष मिल गया है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के करीबी सुरजीत सिंह चड्ढा को शहराध्यक्ष नियुक्त करने के आदेश गुरुवार शाम को जारी किया गया। इसके साथ ही भोपाल शहर के लिए मोनू सक्सेना, खंडवा शहर के लिए मनीष मिश्रा और खंडवा ग्रामीण अध्यक्ष के लिए अजय ओझा को नियुक्त किया गया है। चड्ढा पूर्व कांग्रेस शहर अध्यक्ष उजागर सिंह चड्ढा के बेटे हैं। पिता-पुत्र दोनों विधायक के चुनाव भी लड़ चुके हैं लेकिन जीत नहीं मिली थी। अरविंद बागड़ी और गोलू अग्निहोत्री प्रदेश कमेटी में मिला पद हालांकि शहराध्यक्ष पद की दौड़ में रहे अरविंद बागड़ी और विशाल (गोलू) अग्निहोत्री दोनों को ही प्रदेश कमेटी में सचिव पद के लिए मनोनीत कर भरपाई की गई है। बाकलीवाल पहले ही प्रदेश कमेटी में शामिल है। इस तरह कांग्रेस ने शहराध्यक्ष के दावेदारों को झटका भी दिया और पार्टी से नाराजगी दूर करने के लिए प्रदेश कमेटी में पद भी दे दिया। बड़े आपस की लड़ाई में उलझे चुपचाप आगे निकल गए चड्ढा इस पद के लिए अरविंद बागड़ी की नियुक्ति जनवरी माह में की गई थी लेकिन विरोध के बाद उन्हें होल्ड कर पूर्व शहर अध्यक्ष विनय बाकलीवाल को फिर प्रभार दिया गया लेकिन इसके बाद उन्हें भी होल्ड कर दिया गया और महेंद्र जोशी को प्रभार दे दिया गया। इस पद के लिए बागड़ी और बाकलीवाल के बीच खींचतान चल रही थी, इसी बीच गोलू अग्निहोत्री भी लगे हुए थे। बागड़ी ने अग्रवाल समाज का दबाव लगाया और साथ ही जीतू पटवारी और शोभा ओझा का भी समर्थन था, लेकिन बागड़ी को लेकर आए फीडबैक और फिर पटवारी के पर्दे के पीछे जुटे होने की कहानी के चलते कमलनाथ ने बागड़ी से दूरी बना ली। इसी तरह बाकलीवाल के समर्थकों द्वारा बागड़ी के शहराध्यक्ष बनने पर किए गए विरोध प्रदर्शन ने कमलनाथ को नाराज कर दिया, जबकि बाकलीवाल उनके करीबी थे। उधर गोलू अग्निहोत्री निगम नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे के साथ दिल्ली तक दौड़ आए इन्होने कमलनाथ को नाराज कर दिया। ऐसे में तीनों ही दावेदार एक-एक कर बाहर हो गए।

जो सर्वे में आएगा उसे ही मिलेगा टिकट, कोई गुटबाजी नहीं है चड्ढा

नए शहराध्यक्ष सुरजीत सिंह चड्ढा ने मीडिया से चर्चा में कहा कि चुनाव के पहले पार्टी ने मुझे अहम जिम्मेदारी दी है, मेरा काम होगा कि शहर की पांचों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस को जीत दिलाना। कांग्रेस में कोई गुटबाजी नहीं है और जो शीर्ष नेतृत्व तय करेगा उसी तरह आगे बढ़ा जाएगा। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह पहले ही कह चुके हैं कि ना तेरा ना मेरा जो सर्वे में नाम आएगा, उसे ही टिकट मिलेगा और पार्टी जिसका टिकट तय करेगी, हम सभी उसी के पीछे जिताने के लिए लग जाएंगे। जो भी कार्यकर्ता नाराज है, या गतिविधियों में नहीं आ रहा है, उनके घर जाएंगे, मनाएंगे, पैर पड़ेंगे, साथ लाएंगे। कांग्रेस एकजुट है और आमजन में कांग्रेस के लिए ही मन है, सरकार हमारी ही बनेगी

दिग्विजय सिंह ओर कमलनाथ की जुगलबंदी पर फिर लगी मुहर

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कमलनाथ ने बीच में इस पद के लिए इन तीनों नाम को छोड़कर पूर्व विधायक अश्विन जोशी को तय किया लेकिन जोशी ने टिकट की मंशा में ना कर दिया, फिर दिग्विजय सिंह के ही करीबी रघु परमार से पूछा गया लेकिन वह भी चुनाव लड़ना चाहते हैं। ऐसे में इनके इंकार के बाद फिर दिग्विजय सिंह के ही करीबी चड्ढा को चुना गया, जो पहले राजनीति में लंबे समय से सक्रिय है और शहर को जानते हैं। ऐसे में दिग्विजय सिंह और कमलनाथ की जुगलबंदी पर भी मुहर लगी कि इस चुनाव के लिए दोनों एकजुट होकर लगे हुए हैं। कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह बेटे जयवर्धन को भी इंदौर की चुनावी कमान दी हुई है तो ऐसे में उनके लिए भी आसानी होगी

अब टिकट के लिए गोलू अग्निहोत्री और अरविंद बागड़ी की होगी दावेदारी इस नए समीकरण के बाद यह तय है कि चड्ढा विधानसभा चार से चुनाव नहीं लड़ेंगे, इसके लिए अब सबसे बड़े दावेदार गोलू अग्निहोत्री है, उनकी पत्नी प्रीति भी उतर सकती है। हालांकि यहां से राजा मंधानी, अक्षय बम भी लगे हुए हैं। उधर बागड़ी के लिए अब विधानसभा तीन से टिकट की दावेदारी बन रही है लेकिन वर्तमान बीजेपी विधायक आकाश विजयवर्गीय के पिता व बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय से उनके करीबी होने की खबरें उनके टिकट पर भारी पड़ रही है। ऐसे में यहां से बड़े दावेदार में पिंटू जोशी ही बचते हैं। अश्विन जोशी लगातार दो बार हार चुके हैं, ऐसे में उनके टिकट की राह काफी कठिन है

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