सोची-समझी साजिश को बेनकाब करने का तार्किक और तथ्यात्मक प्रयास है “द केरला स्टोरी” : दीपक जैन “टीनू”

By Abhishek Raghuvanshi
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– शुक्रवार, 05 मई को “फर्स्ट-डे, फर्स्ट-शो” के तहत फिल्म का विशेष शो

– महिला प्रोफेसर, डॉक्टर, वकील, चार्टेड अकाउंटेंट, सामाजिक एवं राजनैतिक क्षेत्र में कार्य करने वाली बहनें भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगी

इंदौर. (03 मई )

लव जिहाद के खतरों और इस षड्यंत्र के शिकार होने से बचने का संदेश है – “द केरला स्टोरी”। भारतभर की युवा बहनों व महिलाओं को मार्मिक संदेश देती इस फ़िल्म का विशेष शो संस्था सार्थक द्वारा शुक्रवार, 05 मई को रखा गया है।

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पूर्व पार्षद एवं संस्था के प्रमुख दीपक जैन “टीनू” ने बताया कि फ़िल्म में तर्क, तथ्य और प्रमाण के आधार पर एक कहानी को बुना गया है। युवाओं की संवेदनशील उम्र और अपरिपक्वता का फायदा उठाकर यदि कोई विचारधारा काम कर रही है, तो उससे कैसे बचा जाए, अब यह भी जानना, समझना और परखना बहुत जरूरी है। यह फिल्म केरल की 32 हजार महिलाओं की कहानी है। जिसमें दावा किया गया है कि इन महिलाओं का जबरन धर्म परिवर्तन करवाया गया और फिर सीरिया भेजा गया। उधर, बीती 2 मई को सुप्रीम कोर्ट ने ‘द केरल स्टोरी’ के खिलाफ दायर की याचिकाओं पर सुनवाई से साफ इंकार कर दिया और कहा कि फिल्म को सेंसर बोर्ड से मंजूरी मिली है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगा।

धर्म परिवर्तन के लिए दबाव-प्रबंधन को बेनकाब करना, योजनाबद्ध षड्यंत्र को उजागर करना और सोची-समझी साजिश के खिलाफ जागरूकता के उद्देश्य से इस फिल्म का विशेष शो आयोजित किया जा रहा है। दरअसल, “द केरला स्टोरी” जैसी फ़िल्म का विशेष शो समाज के अलग-अलग वर्गों की बहनों को एकत्र करने का भी एक विनम्र प्रयास है। इस समूह में प्रोफेसर, डॉक्टर, वकील, चार्टेड अकाउंटेंट, सामाजिक एवं राजनैतिक क्षेत्र में कार्य करने वाली बहनें भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगी।

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