इंदौर। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों को लेकर मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के समक्ष चल रही जनहित याचिका में सोमवार को सुनवाई हुई। शासन ने याचिका में जवाब देते हुए कहा है कि शासकीय अस्पतालों में मरीजों को दवाइयां निश्शुल्क उपलब्ध करवाई जाती हैं। इसलिए शासकीय अस्पतालों में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों की आवश्यकता ही नहीं है। याचिका में अब कोर्ट 28 मार्च को अंतिम बहस सुनेगा। इसके बाद ही तय होगा कि शासकीय और निजी अस्पतालों में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोलने के लिए शासन को बाध्य किया जा सकता है या नहीं।
सरकारी और निजी अस्पताल में नहीं हैं जन औषधि केंद्र
यह जनहित याचिका एडवोकेट विनोद द्विवेदी ने दायर की है। इसमें कहा है कि प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र एक अच्छी योजना है। इसके माध्यम से आमजन को सस्ती दवाइयां उपलब्ध हो रही हैं। सरकार ने जगह-जगह ये केंद्र खोले हैं, लेकिन सरकारी और निजी अस्पतालों में ये केंद्र नहीं हैं, जबकि इनकी सबसे ज्यादा आवश्यकता वहीं है। शासन ने पूर्व में प्रस्तुत अपने जवाब में कहा था कि प्रदेश में 267 जन औषधि केंद्र संचालित हो रहे हैं। एडवोकेट द्विवेदी ने कहा कि शासन ने सोमवार को दिए जवाब में शासकीय अस्पतालों में इन केंद्रों की आवश्यकता से ही इनकार कर दिया है।
