लापता चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को लेकर इंदौर हाईकोर्ट ने किया नगर निगम के विरुद्ध ऐतिहासिक फैसला..

By Abhishek Raghuvanshi
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पिटीशनर रशीदा बी के पति फिरोज अंसारी इंदौर नगर निगम में प्यून के पद से रिटायर होकर पेंशनधारी थे, जून 2020 को कोरोना काल के दौरान अचानक लापता हो गए ओर इंदौर के सदर थाने में उनकी गुमशुदगी दर्ज की गई । लापता फिरोज अंसारी की पत्नी रशीदा बी ने नगर निगम के अफसरों से पति की पेंशन खुद के नाम पर पुनः चालू करने का निवेदन किया जिसे नगर निगम के अफसरों ने यह कहकर खारिज कर दिया की पति के “सिविल डेथ” (7 साल तक मिसिंग रहने पर मिलने वाला प्रमाण पत्र) का सर्टिफिकेट लेकर आओ फिर पेंशन जारी करेंगे! निगम के अफसरों की बेरुखी और तंगहाली जूझ रही रशीदा बी ने हाईकोर्ट का रुख कर 6 अप्रैल 23 को याचिका दायर कर इंसाफ़ की गुहार लगाई।
इंदौर हाईकोर्ट खण्डपीठ के माननीय जज विवेक रूसिया ने महज 4 माह में याचिका पर सुनवाई करते हुए नगर निगम के अफसरों को कड़ी फटकार लगाते हुए तल्ख टिप्पणी के साथ तत्काल पेंशन जारी करने के आदेश दिए।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को एमपी सर्विस रूल्स से परे जाते हुए एरियर की राशि मिसिंग डेट से से सात वर्ष बाद अदा किए जाने और तत्काल पेंशन प्रदान करने के आदेश जारी किए। यहां गौर करने वाली बात है कि एमपी सर्विस रूल्स में मिसिंग रिटायर्ड को पेंशन का कोई प्रावधान नही है। विधि विशेषज्ञों की राय में ये फैसला ऐतिहासिक नज़ीर है

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