
इंदौर – जंगल है, तभी जीवन संभव है। इस वाक्य का चरितार्थ कर रहा है इंदैर वन मंडल। मंडल द्वारा 200 हेक्टेयर जमीन पर जंगल तैयार किया जा रहा है, जो भविष्य में ग्रामीणजनों की भाग्य रेखा बदलेगा। इससे वन उपज तो मिलेगी ही साथ ही पर्यावरण, रोजगार, कोशल-विकास, जल संरक्षण आदि में भी महत्वपूर्ण साबित होगा।

वन मंडल अधिकारी श्री नरेन्द्र पंडवा के अनुसार क्षतिपूर्ति वनीकरण योजना के तहत मानपुर फारेस्ट रेंज के अवलाये में 120 हेक्टेयर और इंदौर फारेस्ट रेंज के कम्पेल में 79 हेक्टेयर में जंगल खड़ा किया जा रहा है। इन दोनों इलाकों की बंजर भूमि और बिगड़े वनों को सुधारते हुये कंटीली झाड़ियाँ हटाकर गड्डे खोदे गये। उपजाऊ मिट्टी और खाद के साथ बीज डाले गये। अब ये बीज अंकुरित हो गये है। जंगलों की सुरक्षा के लिये तार फेंसिंग की गई है। कुछ सालों बाद यह पौधे वृक्ष का रूप ले लेंगे। फलों के साथ-साथ जलाऊ लकड़ी, और घास मिलेगी। प्रचुर मात्रा में मिले घास को दूध उत्पादकों को किया जायेगा। जिसके कारण दूध उत्पादन बढ़ेगा।
योजना के तहत जमीन तैयार करने और जंगल बनाने में ग्राम समितियों के साथ-साथ बीएसएफ और ग्रामीणों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। स्थानीय निवासी रमण बेरागी और अन्य ग्रामीणजनों का कहना है कि भविष्य में यह जगल हमारी भाग्य रेखा को बदल देगा। इससे कई ग्रामों की उन्नति , समृद्धि होगी। अवलाय में एक लाख 20 पौधे रोपे गये तथा 10 तलैया बनाई गई है। इसी तरह कम्पेल बीट में 79 हजार पौधे रोपे गये। यहां चार तलैया, एक तालाब, 3 हजार कंटूर ट्रेंच, 15 चेकडेम और 32 अन्य जल सरचनाएं तैयार की गई। ग्रामीणजन खुद कहने लगे है कि जंगल है तभी तो जीवन है।
