परिवर्तनी एकादशी पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु…अपनी गहरी निद्रा के बाद करवट लेते हैं…इसे डोल ग्यारस भी बोला जाता है! इस अवसर पर भगवान श्री कृष्णा लड्डू गोपाल जन्म के बाद जल व्यवहार के लिए निकलते हैं! नगर में इसी परंपरा का निर्माण वर्षों से चला आ रहा है! रात्रि में गांधीचौक से पूरे गाजे बाजे के साथ जगमगाती रोशनी के बीच भगवान के डोले निकले जाते हैं! यह नगर में मुख मार्गो से भ्रमण करते हुए शीतला माता मंदिर पहुंचने हैं जहां पर भगवान जल विहार करते हैं। इस डोला चल समारोह में सामाजिक समरसता देखने को मिलती है सोनी,कुशवाहा,कोरी, ब्राह्मण,नामदेव,ठाकुर आदि समाज के अपने-अपने डोला लेकर कार्यक्रम में पहुंचते हैं।
