जिला एवं सत्र न्यायालय ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा है कि पुलिस सुनी-सुनाई बातों और उतावलेपन में प्रकरण बनाना बंद करे। पुलिस की लापरवाही की वजह से एक छात्र के शैक्षणिक जीवन के 10 साल खराब हो गए। प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी परमानंद चौहान की कोर्ट के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई।
अधिवक्ता मनोज बिनीवाले के मुताबिक पूर्वी रिंग रोड पर छात्र ज्योतिरादित्य अपनी सहपाठी के साथ जा रहा था, तभी एक्सीडेंट हो गया था, जिससे छात्रा को गंभीर चोट आई थी। पुलिस ने छात्रा के परिजन के बयान के आधार पर छात्र पर हत्या करने की धारा में केस दर्ज कर लिया, जबकि छात्रा का दो महीने तक उपचार चलता रहा। लंबे इलाज के बाद छात्रा की मृत्यु हो गई थी। पुलिस ने व्यस्त रिंग रोड पर हुई घटना में किसी भी व्यक्ति से यह बयान नहीं लिए कि किस तरह छात्रा पर छात्र ने प्रहार किया।
