अपनी मांगों को लेकर चिकित्सक महासंघ के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे शासकीय अस्पतालों के डाक्टरों ने मंगलवार को दो घंटे तक स्वास्थ्य सेवाएं बंद रखी। इसके कारण मरीजों को इलाज नहीं मिल पाया। मरीजों को डाक्टरों की हड़ताल के बारे में पहले से कोई सूचना नहीं थी। इसके कारण दूर-दूर से मरीज ओपीडी में जांच करवाने के लिए आए थे, लेकिन उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा। उधर, बुधवार से दिनभर स्वास्थ्य सेवाएं बंद रहेगी।
सारंगपुर से 60 वर्षीय भंवर बाई इंफेक्शन की रिपोर्ट दिखाने के लिए एमवाय अस्पताल ओपीडी में आई थी। उनका इलाज भी यहीं चल रहा था। वे अपने बेटे के साथ व्हीलचेयर पर आई थी, लेकिन उन्हें डाक्टर ही नहीं मिले। गरीब परिवार के तालुक रखने वाले इन लोगों को जब डाक्टर नहीं होने की सूचना मिली तो आक्रोशित भी हुए और मासूस भी। बेटे ने बताया कि हम किराए की गाड़ी कर इतनी दूर से यहां आए हैं। यहां आने में काफी पैसा भी खर्च हुआ है। सुबह नौ बजे से हम यहां अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। हमें 11 बजे पता चला कि अब डाक्टर नहीं मिलेंगे। ऐसे ही कई मरीज ओपीडी में परेशान होते रहे। डाक्टर एमवाय अस्पताल के गेट पर काली पट्टी बांधकर विरोध करते रहे।
कई सरकारी अस्पताल में भटकते रहे मरीज
उधर, जिला अस्पताल, एमटीएच, हुकमचंद, कैंसर अस्पताल, चाचा नेहरू अस्पताल आदि अस्पतालों में भी मरीजों को इलाज नहीं मिल पाया। प्रदर्शन कर रहे डाक्टरों ने बताया कि हमारी मुख्य मांग है कि डीएसीपी प्रदेश में लागू किया जाए। पहले भी सरकार ने हमें आश्वासन दिया था, लेकिन लागू नहीं किया। जब तक हमारी मांग पूरी नहीं कि जाएगी, हम अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे। जूनियर डाक्टर एसोसिएशन भी इस प्रदर्शन में शामिल हो चुका है। उन्होंने भी बांड राशि समाप्त करने, ट्यूशन फीस कम करने, एनसीएम लागू आदि मांग की है।
पीसी सेठी अस्पताल में गर्भवती हुईं परेशान
पीसी सेठी अस्पताल में गर्भवती महिलाएं ओपीडी में डाक्टर को दिखाने के लिए सुबह से लाइन में घंटों तक खड़ी रही। इसके बाद भी उन्हें डाक्टर नहीं मिल पाए। सुखलिया से पति के साथ आई महिला ने बताया कि मैं सुबह से यहां डाक्टर का इंतजार कर रही हूं। हमें पहले से कोई सूचना नहीं थी कि आज डाक्टर नहीं मिलेंगे। डाक्टर को दिखाना भी जरूरी है, इसलिए सुबह नौ बजे से यहां अपनी बारी का इंतजार कर रही हूं। इसी प्रकार अन्य गर्भवती महिलाएं भी परेशान होती रही।
