‘मृत्युंजयी सावरकर’ जीवन गाथा – योग्य समय में योग्य शस्त्र का प्रयोग ही सामर्थ्यता है –श्री चारूदत्त आफले जी

By Abhishek Raghuvanshi
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अखिल भारतीय सहव्यवस्था प्रमुख अनिल ओक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मालवा प्रांत सहकार्यवाह श्री विनीत नवाथे
ने माल्यर्पण कर दिप प्रज्वलन किया

इंदौर। श्री महाराष्ट्र मंडल रामबाग और स्वराज संस्थान संचालनालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम मृत्युंजयी सावरकर के दूसरे दिन श्री चारूदत्त आफले जी के द्वारा कीर्तन और उद्बोधन के माध्यम से सावरकर गाथा प्रस्तुत की। अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के श्री अखिल भारतीय सहव्यवस्था प्रमुख अनिल ओक के साथ मालवा प्रांत सहकार्यवाह श्री विनीत नवाथे और वरिष्ठ स्वयंसेवक ईश्वर हिंदुजा ने वीर सावरकर की प्रतिमा पर माल्यर्पण कर दिप प्रज्वलन किया।

सावरकर जी की जीवन गाथा में श्री चारूदत्त आफले जी ने कहा कि
कभी में मन मे हारना नही है यह सावरकर जी से सीखने को मिलता है । अपने देश प्रति प्रेम रखे और देश हित मे कार्य करे । संत तुलसीदास, महर्षि वशिष्ठ, विश्वामित्र ने भलेही शस्त्र नहीं उठाया पर कभी राम जैसे शस्त्रधारी की निन्दा नहीं की।योग्य समय में योग्य शस्त्र का प्रयोग ही सामर्थ्यता है।
प्रथम दिवस को‌ चाफेकर बंधुओं के बलिदान से सावरकर के लंदन प्रस्थान तक की गाथा प्रस्तुत की गई थी। इसी क्रम में शनिवार को लंदन और अंडमान के काला पानी का अध्याय संपूर्ण हुआ।

कार्यक्रम में श्री गणेश मंडल संस्था के अध्यक्ष श्री विनय पिंगले, समर्थमठ संस्था के अध्यक्ष श्री अशोक पाटनकर, सर्व मराठी भाषी सोशल एंड कल्चरल सोसायटी की अध्यक्षा श्रीमती स्वाति ताई काशिद और लोकमान्य नगर के पूर्व अध्यक्ष श्री वैभव ठाकुर का सम्मान किया गया। संचालन श्री नवीन धोड़पकर ने किया। अतिथि स्वागत शेखर कीबे , अमित करपे , अभय लक्कड़ ने किया ।

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