नाबालिग से दुष्कर्म कर मतांतरण का दबाव बनाने वाले को 20 वर्ष की सजा

By Abhishek Raghuvanshi
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न्यायालय ने कहा- दुष्कर्मी ने मतांतरण के लिए दबाव बनाया, उसे लेकर उदारतापूर्वक विचार किया तो समाज पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा, उदारता नही बरत सकते।

नाबालिग के साथ दुष्कर्म कर उस पर मतांतरण का दबाव बनाने वाले दुष्कर्मी को विशेष न्यायालय इंदौर ने 20 वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने दुष्कर्मी पर 56 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
न्यायालय ने फैसले में लिखा कि अभियुक्त ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म कर उसे धमकी दी, मतांतरण के लिए दबाव बनाया। यह ऐसा कृत्य है जिस पर उदारतापूर्वक विचार किया गया तो समाज पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। दुष्कर्मी के प्रति उदारता नहीं बरती जा सकती। न्यायालय ने पीड़िता को प्रतिकर राशि के रूप में 50 हजार रुपये दिलवाए जाने की अनुशंसा भी की है। अभियोजन के अनुसार संभवत: यह पहला मौका है जब कोर्ट ने पाक्सो एक्ट और मप्र धार्मिक अधिनियम दोनों में एक साथ सजा सुनाई गई है।

घर पर अकेली पाकर की जबरदस्ती
वारदात 9 सितंबर 2020 दोपहर करीब 3.30 बजे की है। पीड़िता घर पर अकेली थी। इस दौरान उसके साथ पढ़ने वाला मोहम्मद साबिर उससे मिलने आया था। वह पानी पीने के बहाने पीड़िता के घर में घुस गया। उसने पीड़िता का मुंह दबाया और चाकू निकालकर कहा कि चिल्लाई तो गर्दन काट दूंगा। आरोपित ने चाकू दिखाकर नाबालिग से दुष्कर्म किया। जाते-जाते कहा कि यह बात किसी को बताई तो उसे जान से मार देगा।

वीडियो वायरल कर परिवार को मारने की धमकी दी
कुछ दिन बाद दुष्कर्मी दोबारा आया और जबरदस्ती करने का प्रयास करने लगा। पीड़िता ने उसे ऐसा करने से रोका तो वह बोला कि मैंने तुम्हारे आपत्तिजनक स्थिति में फोटो और वीडियो बना लिए हैं। तुझे अपना धर्म बदलकर मुस्लिम बनना पड़ेगा और निकाह भी करना पड़ेगा। मैं जैसा कहता हूं करो नहीं तो मैं वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल कर तुम्हें और तुम्हारे परिवार वालों को आत्महत्या के लिए मजबूर कर दूंगा। बाद में पीड़िता ने यह बात माता-पिता को बताई, जिसके बाद मामला पुलिस थाने पहुंचा।

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दुष्कर्म में 20 वर्ष का कठोर कारावास
पुलिस ने मोहम्मद साबिर के खिलाफ धारा 376(2)एन), 376 (3), 450, 506, पाक्सो अधिनियम की धारा 5 (एल)/6 और मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश 2020 की धारा 3/5 के तहत प्रकरण दर्ज किया। अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुशीला राठौर ने पैरवी की। गुरुवार को विशेष न्यायाधीश सुरेखा मिश्रा ने प्रकरण में निर्णय पारित करते हुए दुष्कर्मी मोहम्मद साबिर को भादवि और पाक्सो एक्ट में 20 वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई।

मप्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम में पांच वर्ष की सजा
कोर्ट ने दुष्कर्मी को मप्र धार्मिक स्वततंत्रता अधिनियम की धारा 3/5 में पांच वर्ष कठोर कारावास और 56 हजार रुपये अर्थदंड की सजा भी सुनाई है। कोर्ट ने पीड़िता को प्रतिकर राशि के रूप में 50 हजार रुपये दिलवाए जाने की अनुशंसा भी की है। संभवत: यह पहला मौका है जिसमें पाक्सो एक्ट और मप्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम दोनों में एक साथ सजा सुनाई गई है।

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