इंदौर के युवराज दीक्षित बने सिविल जज, जानिए उनके संघर्ष की कहानी

By Abhishek Raghuvanshi
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट जबलपुर ने सिविल जज का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया है जिसमें इंदौर के जिंसी क्षेत्र के शंकर गंज के रहने वाले युवराज दीक्षित ने पहला स्थान हासिल किया है,दरअसल बचपन से ही कानून की फील्ड में रुचि रखने वाले युवराज जस्टिस एचआर खन्ना को अपना आदर्श मानते हैं और उन्हीं की किताब को पढ़कर प्रेरित हुए हैं ।सिविल जज परीक्षा में मध्यप्रदेश में टॉप करने वाले युवराज दीक्षित ने बताया कि उन्होंने पढ़ाई के लिए लगातार बीच-बीच में समय निकालते थे और परिवार को भी समय देते थे हालांकि युवराज ने इस दौरान मोबाइल को टीवी से दूरी बना रखी थी।

युवराज दीक्षित ने बताया कि इसके पहले भी वह सिविल जज परीक्षा दे चुके हैं और परीक्षा में एक नंबर से पीछे रह गए थे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और सेकंड अटेम्प्ट मैं अपना और परिवार का सपना साकार करते हुए यह मुकाम हासिल किया है। दरअसल युवराज के पिता सुदेश दीक्षित शुरुआत के दिनों में साइकिल सुधारने का काम करते थे जो अब इंदौर नगर निगम में कार्यरत हैं,, परिवार भी अपने बेटे की इस उपलब्धि से गौरवान्वित महसूस कर रहा है युवराज ने बताया कि परिवार में एक छोटी बहन माता-पिता है बहन भी सिविल जज की तैयारी कर रही है वही मां मंजू दीक्षित टीचर है और पिता इंदौर नगर निगम में कार्यरत है ।

युवराज दीक्षित की यहां तक पहुंचने की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है क्योंकि शुरुआत में पिता ने उन्हें इंजीनियर बनने के लिए सब्जेक्ट दिलाया था लेकिन युवराज का मन इंजीनियर की बजाए कानून की जानकारी में अधिक रहता था इसलिए उन्होंने पिता को एलएलबी कॉलेज में एडमिशन दिलाने की बात कही थी जिस पर पिता ने भी बेटे की तमन्ना को पूरा करते हुए एलएलबी करने पर राजी हुए और आज इसका नतीजा यह रहा कि युवराज दीक्षित मध्यप्रदेश में सिविल जज परीक्षा में टॉप पर है इस दौरान उनकी माता ने बताया कि बेटा शुरू से ही पढ़ने में होशियार था लेकिन यहां तक पहुंच जाएगा यह किसी ने सोचा नहीं था आज माता-पिता सहित पूरे परिवार का सीना गर्व से युवराज ने चौड़ा कर दिया है वही अब युवराज का कहना है कि आगे सिविल जज की विशेष ट्रेनिंग पर उसका पूरा ध्यान है और सब को न्याय मिले इसको लेकर काम करने की बात कर रहे हैं इस दौरान मीडिया से बात करते समय युवराज की मां मंजू दीक्षित बेटे की इस उपलब्धि पर अपने खुशी के आंसू रोक नही पाई ओर आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े।

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