शहर में चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़ा कंटेंट इंटरनेट मीडिया पर अपलोड और शेयर करने की सूचनाएं मिलने पर पुलिस ने एक ही रात में पांच केस दर्ज किए हैं। यह सूचना अमेरिका से राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) को और फिर इंदौर पुलिस को मिली थी। पुलिस अब आरोपितों की जानकारी जुटा रही है।
धड़ल्ले से अपलोड हो रहे वीडियो
उल्लेखनीय है कि शहर में चाइल्ड पोर्नोग्राफी का धंधा चलने की जानकारी पुलिस के सामने आई थी। इंटरनेट मीडिया पर भी धड़ल्ले से वीडियो अपलोड हो रहे थे।
एक ही रात में पांच मुकदमे
इसके बाद पुलिस ने एक ही रात में पांच मुकदमे दर्ज कर लिए हैं । बताया जाता है कि इसकी सूचना किसी अन्य देश से मिली थी। इस मामले में पुलिस अब आरोपितों की जानकारी जुटा रही है।
चार पुलिस थानों में प्रकरण
डीसीपी(अपराध)निमिष अग्रवाल के मुकाबिक इस मामले में सदर बाजार,एरोड्रम,गांधीनगर,आजादनगर थाना में प्रकरण दर्ज करवाए गए हैं।
मोबाइल नंबर के आधार पर ही एफआइआर
पुलिस ने फिलहाल इंटरनेट मीडिया (फेसबुक,इंस्टाग्राम,वाट्सएप) पर वीडियो अपलोड करने व बहुप्रसारित करने वाले मोबाइल नंबर के आधार पर ही एफआइआर दर्ज की है। पुलिस अब उन लोगों की जानकारी जुटा रही है जिनके पास उक्त नंबर का सिमकार्ड है। पुलिस के पास 15 से ज्यादा प्रकरण जांच में हैं जिनके विरुद्ध केस दर्ज होने हैं।
ऐसे रखी जाती है निगरानी
उल्लेखनीय है कि अमेरिका में नेशनल सेंटर फार मिसिंग एंड एक्सप्लाइटेड चिल्ड्रन (आइसीएमईसी) साफ्टवेयर के जरिये इंटरनेट मीडिया पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़े कंटेंट पर निगरानी रखी जाती है। आइसीएमईसी वीडियो अपलोड करने वाले उपभोक्ता का इंटरनेट प्रोटोकाल (आइपी) एड्रेस चिह्नित तक संबंधित देश को भेज देते हैं। भारत में यह सूचना एनसीआरबी के पास आती है। एनसीआरबी की साइबर टीम रिपोर्ट को संबंधित राज्य की साइबर सेल के पास भेज देती है। मध्य प्रदेश में साइबर सेल नोडल एजेंसी है। साइबर सेल संबंधित शहर की क्राइम ब्रांच को केस भेजती है। क्राइम ब्रांच मोबाइल नंबर की जानकारी निकाल कर संबंधित थाना में प्रकरण दर्ज करवाती है।
इनका कहना है
चाइल्ड पोर्नोग्राफी गंभीर किस्म का अपराध है। जिसमें पांच साल तक की सजा का प्रावधान है।राष्ट्रीय स्तर की जांच एजेंसियां इसकी निगरानी करती है। पुलिस की सलाह है कि यूजर ऐसे वीडियो और कंटेंट से बचे।
मकरंद देऊस्कर पुलिस आयुक्त
