आरटीओ में हड़ताल खत्म, फिटनेस के लिए कार्यालय पहुंचे सैकड़ों वाहन

By Abhishek Raghuvanshi
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पांच दिनों से चली आ रही हड़ताल शनिवार को खत्म हुई। दिनभर सामान्य दिनों की तरह काम हुआ। फिटनेस के लिए कई वाहन कार्यालय पहुंचे।
हड़ताल के कारण पांच दिन से फिटनेस, परमिट और लाइसेंस के कार्य प्रभावित हुए। फाइलों की पेंडेंसी भी बढ़ गई।
शनिवार को करीब 120 वाहनों के फिटनेस किए गए, जबकि आम दिनों में करीब 100 वाहनों के फिटनेस किए जाते है।
विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेश के सभी आरटीओ अधिकारी और कर्मचारी हड़ताल पर थे। इससे सभी काम प्रभावित हुए।
प्रदेश के सभी परिवहन आफिसों में चल रही हड़ताल पांच दिन बाद खत्म हो गई और शनिवार को सभी आफिस अपने तय समय से खुले। हड़ताल खत्म होने की जानकारी लगते ही कार्यालय के बाहर फिटनेस के लिए वाहनों की कतार लग गई। सैकड़ाें वाहनों के फिटनेस किए गए। हड़ताल के कारण पांच दिन से फिटनेस, परमिट और लाइसेंस के कार्य प्रभावित थे। इस दौरान आनलाइन आवेदन करने वाले आवेदकों की फाइलों की पेंडेंसी भी बढ़ गई है।
नायता मुंडला स्थित परिवहन कार्यालय में सोमवार से चल रही हड़ताल शनिवार को समाप्त हुई। इस कारण आरटीओ कार्यालय में कमर्शियल वाहनों के फिटनेस के लिए लाइन लग गई। करीब 120 वाहनों के फिटनेस किए गए, जबकि आम दिनों में करीब 100 वाहनों के फिटनेस किए जाते है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश परिवहन (राजपत्रित) अधिकारी संगठन के आह्वान पर आरटीओ की हड़ताल बुलाई गई थी। पांच दिन से आरटीओ आफिस बंद होने से आवेदकों को असुविधा होने लगी थी। हजारों वाहनों के पंजीयन, फिटनेस, परमिट सहित लाइसेंस के कार्य प्रभावित हो रहे थे। गणेशोत्सव में बिकने वाले वाहनों के रजिस्ट्रेशन और नंबर प्लेट भी देरी से जारी होगी।
लाइसेंस के आवेदक हुए परेशान
आरटीओ की हड़ताल के कारण लाइसेंस से जुड़े कार्य सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। आनलाइन आवेदन की प्रक्रिया होने के बाद भी अधिकारियों का अप्रूवल नहीं होने से लाइसेंस के कार्य आगे नहीं बढ़ सके। सबसे ज्यादा वाहन ट्रायल, फोटो और बायोमेट्रिक के लिए आवेदक परेशान हुए। यह कार्य पांच दिन से प्रभावित थे।
सामान्य दिन की तरह हुआ काम
लंबे समय से चल रही हड़ताल स्थगित होने के बाद शनिवार को कार्यालय में कार्य शुरू हुए। सबसे अधिक भीड़ वाहनों के फिटनेस के लिए दिखी। 100 से अधिक वाहनों के फिटनेस किए गए। अन्य विभागों में सामान्य दिन की तरह की कार्य हुआ। – प्रदीप कुमार शर्मा, आरटीओ

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