कुलपति के त्वरित इलाज व अस्पताल ले जाने के मामले में दो छात्रों पर लूट डकैती का प्रकरण दर्ज करने के विरुद्ध इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव द्वारा म.प्र. उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर में दायर की जनहित याचिका

By Abhishek Raghuvanshi
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शिक्षक व निजी विश्वविद्यालय के कुलपति के त्वरित इलाज व अस्पताल ले जाने के लिए शासकीय वाहन का उपयोग करने पर दो छात्रों पर लूट व डकैती जैसा गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज होने के विरुद्ध इंदौर के महापौर एवं पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्यमित्र भार्गव द्वारा मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ में जनहित याचिका दायर की गई है.
ज्ञात हो की दिनांक 11.12.2023 को ग्वालियर निवासी दो छात्र हिमांशु श्रोत्रीय व सुकृत् शर्मा पर हाईकोर्ट के जज की गाड़ी को कथित रूप से लूट कर निजी विश्वविद्यालय के कुलपति मृतक श्री रणजीत सिंह यादव को रेलवे स्टेशन से पास ही के चिकित्सालय ले जाना भारी पड़ गया जिन पर लूट व डकैती जैसा गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया गया.
दुर्भाग्यवश उक्त कुलपति यादव के प्राण भी नहीं बचाये जा सके वहीं दोनों छात्र दिनांक 11.12.2023 से जेल में बंद हैं।

याचिका में मध्य प्रदेश के प्रमुख सचिव को प्रतिवादी बनाया जाकर निवेदन किया गया है कि मध्य प्रदेश शासन तत्काल निर्देश जारी करे कि किसी भी प्रकार की मेडिकल इमरजेंसी में शासकीय वाहन का उपयोग करने की छूट प्रदान की जाये

दूसरी सहायता यह चाही गई है कि किसी भी प्रकार की मेडिकल इमरजेंसी में यदि कोई शासकीय कर्मचारी उसके आधिपत्य का शासकीय वाहन मेडिकल इमरजेंसी उपयोग हेतु प्रदान करता है तो उक्त शासकीय कर्मचारी अथवा ड्राइवर के विरुद्ध कोई कार्यवाही न की जाए.

एसपी ग्वालियर व थाना पड़ाव के थाना प्रभारी को प्रतिवादी बनाया जाकर यह सहायता चाही गई है कि दोनों छात्र हिमांशु श्रोत्रीय व सुकृत शर्मा के विरुद्ध दर्ज की गई एफ़आइआर को निरस्त किया जाए क्योंकि उक्त दोनों छात्रों का कृत्य भारतीय दंड विधान की धारा 81 की श्रेणी में आने से अपराध की परिभाषा में नहीं आता है।

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IPC (भारतीय दंड संहिता की धारा ) की धारा 81 के अनुसार:-

कार्य, जिससे अपहानि कारित होना संभाव्य है, किंतु जो आपराधिक आशय के बिना और अन्य अपहानि के निवारण के लिए किया गया है :- “कोई बात केवल इस कारण अपराध नहीं है कि वह यह जानते हुए की गई है कि उससे अपहानि कारित होना संभाव्य है, यदि वह अपहानि कारित करने के किसी आपराधिक आशय के बिना और व्यक्ति या संपत्ति को अन्य अपहानि का निवारण या परिवर्जन करने के प्रयोजन से सद्भावपूर्वक की गई हो।”

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