राहुल के मसले पर दिल्ली में समीकरण बदलने के आसार, एकजुटता के लिए भूलना होगा सियासी फायदा-नुकसान

By Abhishek Raghuvanshi
2 Min Read

राहुल गांधी की लोकसभा से सदस्यता समाप्त होने के बाद दिल्ली में सियासी समीकरण बदलने के आसार हैं। आप मुखिया व दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की तरफ से राहुल गांधी मामले को समर्थन देना इस बात का संकेत है कि भाजपा को निशाना बनाने के लिए दोनों दल एजजुट हो सकते हैं। भाजपा पर निशाना साधने की दोनों पार्टियों को मकसद हासिल करने के लिए सियासी फायदा नुकसान भूलना होगा।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक दोनों पार्टियों को एकजुट होने से पहले जरूरी है कि वोट बैंक की राजनीति और पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में सीटों की दावेदारी जैसे निजी हितों को भूलना होगा। अगर निजी हितों को साथ में रखते हुए गठबंधन की तरफ कदम बढ़े तो उम्मीदों पर पानी फिर सकता है।

दो विपरीत ध्रुवों में बढ़ी नजदीकी
सियासी घमासान में आए इस बदलाव को राजनीतिक जानकार चुंबकत्व का नाम दे रहे हैं। दोनों अलग अलग ध्रुव के तौर पर जाने जानी वाली पार्टियां अब एक दूसरे के साथ खड़ी होती दिख रही हैं। दोनों पार्टियां के लिए यह लड़ाई अहम है। 

चुनावी घमासान की मैदान तैयार होने लगी है। आम आदमी पार्टी के दो पूर्व मंत्रियों के जेल पहुंचने के बाद लगातार पार्टी लगातार भाजपा पर आरोप लगाती रही है। इसे लोकतंत्र पर हमला और निजी स्वार्थ के लिए सीबीआई, ईडी और पुलिस का उपयोग करने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। 

- Advertisement -

दिल्ली कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार ने भाजपा सरकार पर निशाना सधते हुए कहा है कि लोकतंत्र खतरे में है। आरोप है कि राहुल गांधी की आवाज को दबाने के लिए केंद्र सभी सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है। इसे षड़यंत्र करार देते हुए हर कीमत पर कांग्रेस ने लड़ाई जारी रखने की बात दोहराई है।

Exit mobile version