क्राइम ब्रांच ने गूगल को नोटिस भेज 200 एप बंद करवाए, फोन हैक कर महिलाओं को ब्लैकमेल कर रहे थे रिकवरी एजेंट।
फटाफट लोन का झांसा देकर चीनी कंपनियां लोगों के करोड़ों रुपये ठग रही थी। क्राइम ब्रांच ने फर्जी एप के जरिये जाल में फंसाने वाली करीब 200 एप को प्ले स्टोर से हटवाया है। एप से लोन ले चुके कई लोग आत्महत्या कर चुके हैं। कार्रवाई के बाद शिकायतों में भी भारी कमी आई है।
एमजी रोड निवासी निजी बैंक की कर्मचारी फटाफट लोन का मैसेज देख चौंक गई। मोबाइल पर आई लिंक पर क्लिक करते ही एक एप इंस्टाल हुआ। ब्याज दरें ज्यादा होने पर युवती ने लोन की राशि तुरंत चुका दी, लेकिन एक सप्ताह बाद ही रिकवरी एजेंट का काल आया और कहा कि ब्याज तो चुकाना होगा। युवती ने बहस की तो जालसाज ने दनादन युवती के निजी फोटो भेजना शुरू कर दिए। युवती कुछ समझती, इसके पहले जालसाज ने वाट्सएप काल कर कहा, फोन का डाटा उसके पास आ गया है। जितना ब्याज मांगा वो भर दो वरना ये फोटो तुम्हारे माता-पिता और रिश्तेदारों के पास पहुंच जाएंगे, जिनके नंबर फोन में सेव है। क्राइम ब्रांच में इस तरह की 400 से ज्यादा शिकायतें पहुंची हैं जो ऐसी ही फर्जी लोन एप का शिकार हुए हैं। जांच में पता चला सर्वर चीनी कंपनियों के पास है और इनका रिजर्व बैंक आफ इंडिया की वेबसाइट पर रजिस्टर्ड भी नहीं है। क्राइम ब्रांच ने करीब 400 फर्जी एप का डाटा एकत्र कर आरबीआइ को भेजा और गूगल को नोटिस जारी कर 200 एप बंद करवा दी।
पत्नी-बच्चों को दिया जहर
केस 1 – गत अगस्त में भागीरथपुरा निवासी अमित यादव ने दो बच्चों और पत्नी की हत्या के बाद खुद ने फांसी लगा ली। पेशे से मैकेनिक अमित ने चार एप से लोन लिया था। किस्तें न भरने पर रिकवरी एजेंट सिविल बिगाड़ने की धमकी देकर ब्लैकमेल कर रहे थे। क्राइम ब्रांच ने जांच की और आरबीआइ से एप की जानकारी मांगी।
केस 2 – हरदा निवासी गौरव गुर्जर ने इसी वर्ष नवंबर में फांसी लगा ली थी। मूलत: जतारा निवासी गौरव फार्मा कंपनी में इलेक्ट्रिक सुपरवाइजर की नौकरी करता था। बीमारी के कारण नौकरी छूट गई और उसने निजी फाइनेंस कंपनी से कर्जा ले लिए। गौरव ने एक साल तो किस्तें भरी, लेकिन इसके बाद वह किस्तें नहीं जमा कर पाया। कंपनी ने उसे भी मैसेज भेजकर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।
इन पर न करें विश्वास
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वैधानिकता जांच लें – डीसीपी अपराध निमिष अग्रवाल का कहना है कि लोन लेने के पहले रिजर्व बैंक आफ इंडिया की वेबसाइट पर एप की वैधानिकता जांच लें। कोशिश करें एप को इंस्टाल ही न करें। अधिकृत कार्यालय जाकर ही लोन लें।
