ऋषि सुनक ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री होंगे। लिज ट्रस के इस्तीफा देने के बाद ब्रिटेन में सत्तारूढ़ कंजर्वेटिव पार्टी को अपना नया नेता चुनना था। इस होड़ में सुनक और पेनी मॉर्डांट आमने-सामने थे। लेकिन सोमवार को मॉर्डांट ने अपना नाम वापस ले लिया। सुनक के रूप में उस ब्रिटेन को भारतीय मूल का पहला प्रधानमंत्री मिलने जा रहा है, जिसने भारत पर लंबे समय तक राज किया था। 42 साल के सुनक आधुनिक दौर में ब्रिटेन के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। किंग चार्ल्स तृतीय के ऑफिस ने उनके नाम पर मुहर लगा दी है।
सुनक का ब्रिटेन का प्रधानमंत्री बनना इस मायने में भी बेहद अहम बात है कि ब्रिटेन में भारतीय मूल के लोग अल्पसंख्यक हैं। उनकी आबादी कम है। इसके बावजूद सुनक को ब्रिटेन में पीएम बनने का मौका मिल गया है। एक और खास बात यह है कि सुनक को ऐसी पार्टी ने अपना नेता चुना है, जो रूढ़िवादी विचारों के लिए जानी जाती है। प्रवासी लोगों के लिए कंजर्वेटिव पार्टी का रुख उदार नहीं रहा है। दुनिया में बढ़ रही कट्टरता और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने की बढ़ती हरकतों के बीच ब्रिटेन और वहां की कंजर्वेटिव पार्टी ने जो फैसला किया है, वह दुनिया को एक नई राह दिखाएगा, यह उम्मीद की जानी चाहिए।
कौन हैं ऋषि सुनक ( Who is Rishi Sunak)
ऋषि सुनक के माता-पिता भारतीय मूल के हैं। उनके माता-पिता 1960 के दशक में ईस्ट अफ्रीका से ब्रिटेन पहुंचे थे। उनके पिता यशवीर सुनक नैशनल हेल्थ सर्विस में जनरल प्रैक्टिशनर थे और उनकी मां उषा सुनक केमिस्ट शॉप चलाती थीं।
गोल्डमैन सैक्स में अधिकारी रह चुके ऋषि सुनक इंफोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति के दामाद हैं। उनकी पत्नी का नाम अक्षता मूर्ति है। सुनक और अक्षता की दो बेटियां कृष्णा और अनुष्का हैं। यॉर्कशर में रिचमंड से कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद सुनक को करीब दो साल पहले बोरिस जॉनसन सरकार में तब वित्त मंत्री बनाया गया था, जब साजिद जावेद ने इस पद से इस्तीफा दे दिया था। जावेद को बाद में कोविड महामारी के दौरान स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया।
1980 में जन्मे सुनक ने विंचेस्टर कॉलेज से पढ़ाई की। ऑक्सफर्ड में पॉलिटिकल साइंस और इकॉनमिक्स जैसे विषयों की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए किया। राजनीति में आने से पहले सुनक गोल्डमैन सैक्स में बैंकर थे। उन्होंने बाद में अपनी एक इनवेस्टमेंट फर्म भी शुरू की थी।
2015 में राजनीति में कदम रखने वाले सुनक फरवरी 2020 से मंत्री पद पर थे। कइयों का मानना था कि जॉनसन के बाद वह कंजर्वेटिव पार्टी के लीडर बन सकते हैं। हालांकि इसी साल सुनक की इमेज को एक बड़ा झटका लगा था, जब उनकी पत्नी के नॉन-डोमिसाइल टैक्स स्टेटस को लेकर सवाल उठे। यह आरोप भी लगा कि मंत्री पद पर रहते हुए सुनक के पास अमेरिकन ग्रीन कार्ड था।
ऋषि सुनक ने जब पहली बार यॉकर्शर से सांसद पद की शपथ ली थी, तब उन्होंने ब्रिटिश संसद में भगवदगीता के नाम पर शपथ ली थी। वह ब्रिटेन में ऐसा करने वाले पहले सांसद थे।
बोरिस जॉनसन के इस्तीफा देने के बाद कंजर्वेटिव पार्टी में जब नया नेता चुनने की रेस शुरू हुई तो आखिरी चरण में सुनक और लिज ट़्रस बचे थे। बाजी लिज ट्रस के हाथ लगी थी। लेकिन ब्रिटिश इकॉनमी को गहरे संकट से निकालने के लिज ट्रस के उपायों ने मामला और बिगाड़ दिया। आखिरकार उन्हें डेढ़ महीने से भी कम समय में इस्तीफा देना पड़ गया।
सुनक के सामने कैसी चुनौती है?
ब्रिटेन गहरे आर्थिक संकट की ओर बढ़ता दिख रहा है। महंगाई 40 साल के उच्चतम स्तर पर है। बैंक ऑफ इंग्लैंड का अनुमान है कि इस साल इंफ्लेशन 11 प्रतिशत के ऊपर जा सकती है। ऋषि सुनक इससे पहले बोरिस जॉनसन सरकार में वित्त मंत्री रह चुके हैं। उनके मंत्री रहते ब्रिटेन में महंगाई 40 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी। टैक्स भी बढ़ाए गए थे। जॉनसन मंत्रिमंडल से इस्तीफा देते हुए सुनक ने लिखा था कि कम टैक्स रेट और ऊंची ग्रोथ रेट वाली इकॉनमी तभी बनाई जा सकती है, जब ‘हम कड़ी मेहनत करने, कुर्बानियां देने और कड़े फैसले करने को तैयार हों। मेरा मानना है कि जनता सच सुनने को तैयार है। पब्लिक को यह बताया जाना चाहिए कि बेहतरी का रास्ता है, लेकिन यह आसान नहीं है।‘ सुनक ने तब जिस कड़ी मेहनत की बात की थी, वह अब उन्हें खुद करके दिखानी होगी।
