हिजाब अजान और हनुमान चालीसा के बीच इंदौर में उर्दू हनुमान चालीसा की हुई एंट्री

By Abhishek Raghuvanshi
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हिजाब अजान और हनुमान चालीसा के बीच इंदौर में उर्दू हनुमान चालीसा की हुई एंट्री। इंदौर में उर्दू में लिखी हनुमान चालीसा सुंदरकांड रामायण की अचानक बढ़ी डिमांड।

दरअसल पहले जहां एक महीने में हनुमान चालीसा धर्म की किताबे बिकती थी पिछले कुछ दिनों से डिमांड दुगनी हो गई। राजवाड़ा स्थित सरदार सोहन सिंह बुक सेलर दुकान पर लोग उर्दू किताब खरीदने पहुंच रहे हैं यह पहले हिंदी इंग्लिश में आया करती थी जिसके बाद हनुमान चालीसा , सुंदरकांड और रामायण अब उर्दू में आ गई है। उर्दू में देखकर किसी धर्म किताब को आप समझेंगे कि यह कुरान है,लेकिन यह कुरान नहीं बल्कि हनुमान चालीसा है। हनुमान चालीसा का पाठ इंदौर में उर्दू में किया जा रहा है। दुकान संचालक ने बताया पंजाब के सिंध प्रदेश से विस्थापित लोग जिन्होंने इंदौर में शरण ली थी उन्हें अभिन्न की नागरिकता में मिल चुकी है यह समुदाय के लोग वर्षों तक पाकिस्तान में रहे इसलिए इन्हें उर्दू भाषा में बोलना और पढ़ना हिंदी की अपेक्षा ज्यादा सरल है। इसलिए इस समुदाय के लोग उर्दू भाषा में हनुमान चालीसा रामायण और सुंदर कांड खरीदने आ रहे हैं। गीता भी उर्दू में लिखी हुई है पिछले कुछ दिनों से इन किताबों की डिमांड ज्यादा बढ़ गई है। सबसे खास बात युवा पीढ़ी सबसे ज्यादा हनुमान चालीसा खरीदने दुकान पर पहुंच रही है दुकान संचालक ने कहा पिछले कई सालों के अपेक्षा पिछले कुछ महीनों में युवाओं ने सबसे ज्यादा हनुमान चालीसा खरीदी है हनुमान से जुड़ते युवा पीढ़ी के लोग दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ देश में जहां हिजाब अजान और हनुमान चालीसा को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है तो वहीं इंदौर में युवा पीढ़ी जबरदस्त हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की खरीदारी कर रहे हैं तो वहीं उर्दू में भी सुंदर कांड की जमकर डिमांड देखने को मिल रही है। अभी तक एक महीने में 10 से 15 हनुमान चालीसा की किताब बिकती थी वही अब 10 , 15 से बढ़कर 100 से अधिक उर्दू हनुमान चालीसा की किताब बिक रही है

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