दस्तक अभियान के तहत इंदौर जिले में अब तक 178 बच्चे एनीमिक मिले हैं हालांकि 76 बच्चे माइल्ड और 36 बच्चे मॉडरेट एनीमिया के शिकार है। शून्य से 6 माह के बच्चों को अस्पताल रेफर किया गया है। अभियान के तहत 2298 बच्चों को ओ आर एस का घोल भी दिया गया जिन्हें उल्टी-दस्त की शिकायत थी। 18 जुलाई से प्रारंभ हुआ दस्तक अभियान 8 सितंबर तक चलेगा
स्वास्थ्य विभाग द्वारा 18 जुलाई से दस्तक अभियान प्रारंभ किया गया है जिसके तहत आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता घर-घर पहुंचकर 0 से 5 वर्ष के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रहे है। इंदौर जिले द्वारा 4 लाख 27000 से अधिक बच्चों को डिजिटाइज किया गया है इनमें से 2189 बच्चों की स्क्रीनिंग भी कर ली गई है। स्क्रीनिंग के लिए आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ब्लॉक स्तर पर एक एक घर जहां 0 से 5 वर्ष के बच्चे हैं पहुंचकर उनका स्वास्थ्य परीक्षण कर रहे है, स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान देखा जा रहा है कि बच्चा डायरिया का शिकार तो नही है, उसे विटामिन की आवश्यकता तो नही है, इसके अलावा खून की जांच भी की जा रही है।
26 जुलाई तक जिले में 1918 बच्चों को विटामिन एक ही दवा दी गई जबकि कंगारू मदर केयर के लिए 101 सत्र लगाए जा चुके है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ बी एस सैत्या ने जानकारी देते हुए बताया कि अब तक उल्टी दस्त की शिकायत मिलने पर 2298 बच्चों को ओआरएस का घोल दिया गया है। अब तक चले अभियान में जो सबसे चिंताजनक बात सामने आई है वह बच्चों में खून की कमी होना है 0 से 6 माह के 6 बच्चे ऐसे हैं जिनमें खून की कमी होने से उन्हें अस्पताल रेफर किया गया जबकि 178 बच्चे हैं ऐसे मिले हैं जिनमें माइल्ड या मॉडरेट एनीमिया है।
वर्तमान में टीकाकरण सहित अन्य अभियान जारी है जिसके चलते दस्तक अभियान की गति धीमी है सीएमएचओ के अनुसार 8 सितंबर तक 4 लाख 27 हजार बच्चों की स्क्रीनिंग कर ली जाएगी।
