किसानों की आय दोगुनी करने का पीएम मोदी का वादा, शिवराज के राज में कम हो गई..संसदीय समिति की रिपोर्ट में खुलासा

By Abhishek Raghuvanshi
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साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली तब से ही वे किसानों के विकास को लेकर बात कर रहे हैं। उनकी सरकार का पहला बजट तो गांव पर ही आधारित था। 28 फरवरी 2016 को एक रैली में उन्होंने टारगेट तय किया था कि साल 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करना है। गुरुवार (26 मार्च) को एग्रीकल्चर पर बनी संसदीय समिति ने अपनी जो रिपोर्ट पेश की उसमें किसानों की आय दोगुनी किये जाने के टारगेट से तो सरकार काफी दूर रही लेकिन चार राज्य ऐसे भी उसने दर्शाये जहां किसानों की आय बढ़ने के बजाय कम हो गई। इसमें एक राज्य मध्यप्रदेश भी है यानि शिवराजसिंह चौहान को विपक्ष को देने वाले जवाब के लिए तैयार रहना पड़ेगा। पीएम मोदी को तो उन्हें जवाब देना ही है..।

एग्रीकल्चर पर बनी संसदीय समिति के अध्यक्ष भाजपा सांसद पी.सी. गद्दीगौदर हैं जिससे सरकार के लिए यह रिपोर्ट और ज्यादा मायने रखती है। जो चार राज्य कमाई कम होने की दृष्टि में सामने आए हैं उसमें म.प्र. के अलावा झारखंड, नागालैंड व उड़ीसा भी शामिल है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में दो सर्वे के आंकड़े लिए हैं। ये सर्वे 2015-16 और 2018-19 के हैं। इन सर्वे के हवाले से समिति ने बताया कि 2015-16 में देश के किसानों की महीने की औसत आमदनी 8 हजार 59 रुपये थी जो 2018-19 तक बढ़कर 10 हजार 218 रुपये हो गई। इसका मतलब यह रहा कि चार साल में किसानों की आय 2 हजार 159 रुपये ही बढ़़ी। बात यदि म.प्र. की करें तो रिपोर्ट में बताया गया है कि म.प्र. के किसानों की आमदनी 1400 रुपये घट गई। इसी तरह झारखंड में 2 हजार 173, नागालैंड में 1 हजार 551 और उड़ीसा में 162 रुपये आमदनी घटी है। आपको बता दें रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा किसानों की आय मेघालय में है जो हर माह 29 हजार 348 रुपये है। दूसरे नंबर पर पंजाब (26 हजार 701 रुपये) है और तीसरे नंबर पर हरियाणा (22 हजार 841) है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह टारगेट 2022 इसलिए सेट किया था क्योंकि इस साल हमारे देश की आजादी को 75 साल होने वाले हैं।

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