पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान इन दिनों चौतरफा आफतों से घिरे हुए हैं। एक तरफ जहां आतंकी संगठन पाक शहरों को निशाना बना रहे हैं, वहीं कट्टरपंथी जमातें सरकार को हर मोर्चे पर सरेंडर के लिए मजबूर कर रही हैं। पाकिस्तान में आतंकियों के सामने सरकार किस कदर खोखली हो चुकी है इसका एक उदाहरण गुरुवार को राजधानी इस्लामाबाद में देखने को मिला।
गुरुवार को कट्टरपंथी राजनीतिक जमात JUI-F के मौलाना फजल उल रहमान के सांसदों को सुरक्षा देने के नाम पर अंसार उल इस्लाम के कई आतंकी संसद की लाउंज में घुस गए। जिसके बाद पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की इस कार्रवाई पर मौलाना फजल उल रहमान ने प्रदर्शन और चक्काजाम की धमकी देकर हुकूमत को सरेंडर पर मजबूर कर दिया। इमरान सरकार ने शुक्रवार सुबह अभी आतंकियों को रिहा कर दिया।
पिछले महीने भी TTP के 46 आतंकियों को रिहा किया था
यह पहली बार नहीं है कि जब इमरान खान ने आतंकियों की रिहाई का आदेश दिया हो। पिछले महीने भी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के साथ सुलह के मकसद से पाक हुकूमत ने 46 कैदियों रिहा कर दिया। हालांकि, तहरीक-ए-तालिबान 102 आंतकियों की रिहाई चाहता था।
इमरान खान को हटाने की तैयारी
इमरान खान को पद से हटाने के लिए विपक्ष ने तैयारी कर ली है। पाकिस्तान में विपक्ष की तरफ से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर 22 मार्च को वोटिंग होनी है। मौलाना फजल उल रहमान की पार्टी भी इस अविश्वास प्रस्ताव को समर्थन दे रही है। वहीं, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के सह-अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ने दावा किया है कि विपक्ष के पास 200 सांसदों का समर्थन है, जो इमरान खान और उनकी सरकार को हटाने के लिए पर्याप्त है।
कौन हैं मौलाना फजल उल रहमान?
मौलाना पाकिस्तान की सबसे बड़ी पार्टी और सुन्नी कट्टरपंथी दल जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI-F) का मुखिया है। वे तालिबान का समर्थक माना जाता है। उसे फौज का भी काफी करीबी माना जाता है। 2018 में इमरान खान जिस चुनाव में बिना बहुमत हासिल किए सेना के रहम-ओ-करम पर सत्ता में आए थे, मौलाना उस चुनाव में धांधली का आरोप लगाता है।
