यूक्रेन पर हमला किया तो होगा बुरा अंजाम:बाइडेन ने कहा- पुतिन यूक्रेन पर आक्रमण का आदेश दे सकते हैं, लेकिन ‘ऐसा करने के बाद पछताएंगे’

By Abhishek Raghuvanshi
5 Min Read

रूस और यूक्रेन के बीच जंग का खतरा बढ़ता जा रहा है। इसे लेकर अब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन का एक बयान सामने आया है। जो बाइडेन ने बुधवार को कहा कि उन्हें लगता है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन पर आक्रमण का आदेश देंगे। अमेरिका की डिप्लोमेसी और प्रतिबंध लगाने की धमकी भी रूसी नेता को यूक्रेन में सैनिक भेजने से नहीं रोक पाएगी। व्हाइट हाउस में 2 घंटे लंबी चली न्यूज कॉन्फ्रेंस में बाइडेन ने ये बात कही है।

बाइडेन ने कहा, ‘क्या मुझे लगता है कि वह (पुतिन) पश्चिम को टेस्ट करेंगे, अमेरिका और नाटो को टेस्ट करेंगे? हां, मुझे लगता है कि वह ऐसा करेंगे। लेकिन, उन्हें इसकी गंभीर कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्हें ऐसा करने पर पछतावा होगा।’ बाइडेन से जब पूछा गया कि क्या वह स्पष्ट रूप से इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि यूक्रेन पर आक्रमण होने वाला है? बाइडेन ने कहा, ‘मेरा अनुमान है कि ऐसा होने वाला है।’ बाइडने ये भी कहा कि पुतिन यूक्रेन में कुछ ही दूर तक सेना भेजे सकते हैं। वह पूरी तरह से देश पर आक्रमण नहीं करेंगे।

रूस का सीक्रेट मिशन
इससे पहले मंगलवार को ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि रूस बहुत गुपचुप तरीके से यूक्रेन को घेरने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रूस ने 60 बटालियन यूक्रेन के बॉर्डर पर तैनात की हैं। कुल मिलाकर रूसी सैनिकों की संख्या 77 हजार से एक लाख बताई जा रही है। हालांकि, एक महीने पहले पेंटागन ने यह संख्या एक लाख 75 हजार बताई थी। अमेरिकी इंटेलिजेंस को लगता है कि रूसी सेना इस बात का इंतजार कर रही है कि बॉर्डर एरिया में बर्फ पूरी तरह जम जाए। इससे सैनिक और आर्टिलरी को मूव करने में आसानी होगी।

क्रीमिया में हाइवे पर रूसी बख्तरबंद वाहनों का एक काफिला

कीव में मौजूद एम्बेसी लगभग खाली करा ली
5 जनवरी को रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव स्थित अपनी एम्बेसी से 18 लोगों को मॉस्को रवाना किया। ये सभी लोग सड़क के रास्ते 15 घंटे का सफर करने के बाद मॉस्को पहुंचे। इसके बाद अगले कुछ दिनों में 30 और लोगों को इसी तरह मॉस्को भेजा गया। यूक्रेन में कीव के अलावा रूस की दो कॉन्स्युलेट्स भी हैं। इनके कर्मचारियों से कहा गया है कि उन्हें किसी भी वक्त मॉस्को जाने का आदेश दिया जा सकता है।

- Advertisement -

पुतिन का खेल क्या है
एक तरफ तो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन अमेरिकी प्रेसिडेंट जो बाइडेन से यूक्रेन के मसले पर बात कर रहे हैं, दूसरी तरफ रूसी फौज हमले की तैयारियां कर रही है। एम्बेसी को खाली कराया जाना इसी कड़ी में अहम कदम माना जा सकता है। हालांकि, रूस की फॉरेन मिनिस्ट्री ने मंगलवार को कहा कि कीव में उसकी एम्बेसी पहले की तरह काम कर रही है।

अमेरिका भी तैयार
रूस की हरकतों पर अमेरिका और नाटो बहुत पैनी नजर रख रहे हैं। जवाबी तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। फिलहाल, अमेरिका के सहयोगी यूक्रेन की मदद कर रहे हैं। ब्रिटेन ने यूक्रेन की मदद के लिए अहम फैसला किया और इस पर अमल भी शुरू कर दिया। ब्रिटेन ने रूसी टैंकों के मुकाबले के लिए अपने एंटी टैंक वेपन्स यूक्रेन भेजना शुरू कर दिए हैं। दूसरी तरफ, कनाडा ने अपने सैनिकों की एक स्पेशल रेजीमेंट कीव भेज दी है। उधर, बेलारूस के शासक एलेक्जेंडर लुकाशेंको ने कहा कि उनकी सेना रूस के साथ मिलिट्री एक्सरसाइज शुरू कर रही है। यूक्रेन के अफसरों का कहना है कि रूस की सेना बेलारूस से यूक्रेन पर अटैक कर सकती है। इसके लिए यूक्रेन की सेना भी तैयारी कर रही है।

रूस और यूक्रेन के बीच विवाद की वजह क्या है?
यूक्रेन जब सोवियत रूस का हिस्सा था तो राजधानी ‘कीव’ को ‘रूसी शहरों की मां’ कहा जाता था। इससे समझा जा सकता है कि दोनों देशों में कितना गहरा जुड़ाव है। दूसरी वजह यह है कि यूक्रेन नॉर्थ अटलांटिक ट्रिटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) में शामिल हो सकता है जो रूस को पसंद नहीं। NATO उन देशों का ग्रुप है जिसे अमेरिका ने कोल्ड वॉर के दौरान रूस के खिलाफ लड़ने के लिए बनाया था। इस संगठन में शामिल देश एक दूसरे को युद्ध जैसी परिस्थितियों में सैन्य मदद देते हैं। रूस को डर है कि यूक्रेन के NATO में शामिल होने से अमेरिका को रूस के पड़ोस में दबदबा बनाने में मदद मिलेगी।

Exit mobile version