भोपाल – द कश्मीर फाइल्स में कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार की कहानी फिल्माए जाने को लेकर किए गए एक ट्वीट में मध्य प्रदेश के आईएएस अफसर नियाज खान उलझ गए हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि कश्मीर में कश्मीरी ब्राह्मणों के साथ हुए अन्याय अत्याचार को तो फ़िल्म में दर्शाया गया है लेकिन देश के अन्य राज्यों में कीड़े मकोड़ों की तरह मारे जा रहे मुस्लिमों के बारे में भी फिल्म बनाई जानी चाहिए। आईएएस अफसर खान के ट्वीट के बाद भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने मध्य प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि सरकार को इन अफसर के ट्वीट की जांच कराई जानी चाहिए और सरकार को इनसे इस मामले में स्पष्टीकरण लेना चाहिए।
विधायक रामेश्वर शर्मा ने ट्वीट कर कहा कि चलिए 30 साल बाद ही सही पर आपने माना तो कि कश्मीरी पंडितों-हिंदुओं के साथ अनन्य, अत्याचार, बर्बरता हुई। 30 साल बाद आपने माना तो इस्लामिक कट्टरवाद, जिहाद के लिए कैसे हिंदुओं को मिट्टी में मिलाने की सोच का उदाहरण 19 जनवरी 1990 को पेश किया गया।उन्होंने कहा कि यदि इस इस्लामिक कट्टरवाद को नही रोका गया तो भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश के लिए कितना घातक होगा ….इस पर रिसर्च कर नॉवेल कोई IAS (आप जैसे) द्वारा लिखा जाएगा तो निश्चित रूप से यह देश को आगाह करने के लिए ज़्यादा कारग़र सिद्ध होगा।
विधायक शर्मा ने खान को संबोधित ट्वीट में कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा में रहते हुए सिर्फ़ एक वर्ग के प्रति आपकी चिंता व्यक्त करना कहीं न कहीं संघ लोक सेवा आयोग के आचरण नियमों के विपरीत है। फिर भी आपको किसी वर्ग का रहनुमा बनने का शौक़ है तो IAS की नौकरी छोड़ कर मैदान में आइए। मैं मध्यप्रदेश सरकार से भी आग्रह करता हूँ कि इनके कथन पर स्पष्टीकरण लिया जाए और पूछा जाए कि देश में ऐसा कौन सा प्रांत है जहाँ मुसलमानों को मारा जा रहा है। वैसे तो देश में कही दंगे नहीं हो रहे, न हो पाएँगे पर पूर्व में हुए भिवंडी, भागलपुर, मुज़फ़्फ़रनगर, बंगाल, केरल में हिंदू-मुस्लिम दंगो में भी हिंदुओ की मौत का आँकड़ा मुस्लिमों की मौत से ज़्यादा निकलेगा। विधायक शर्मा ने कहा है कि एक बात और नियाज़ खान जी… मुस्लिमों के लिए कीड़ा मकोड़े जैसे शब्दों का इस्तेमाल न करें क्योंकि भारत में सच्चे देशभक्त APJ अब्दुल कलाम साहब, अशफ़ाक़ उल्लाह ख़ाँ जैसे भी हुए हैं।
यह है आईएएस अफसर नियाज खान का ट्वीट
एमपी कैडर के आईएएस अफसर नियाज़ खान ने कल किये 3 ट्वीट में कहा कि कश्मीर फाइल ब्राह्मणों का दर्द दिखाती है। उन्हें पूरे सम्मान के साथ कश्मीर में सुरक्षित रहने की अनुमति दी जानी चाहिए। निर्माता को कई राज्यों में बड़ी संख्या में मुसलमानों की हत्याओं को दिखाने के लिए एक फिल्म भी बनानी चाहिए। मुसलमान कीड़े नहीं बल्कि इंसान और देश के नागरिक हैं। उन्होंने यह भी लिखा है कि समाज का एक हिंसक वर्ग है जिसने सच सुनने के लिए अपने कान बंद कर लिए हैं। यहां तक कि तथाकथित पढ़े-लिखे लोग भी सच बोलने वाले को गाली देने के लिए सड़क स्तर की भाषा का इस्तेमाल करते हैं। खराब परवरिश और कट्टरपंथियों की कंपनी ने उनका दिमाग खा लिया है। गंदी भाषा का प्रयोग उनके दिमाग को दिखाता है।… दुखी।आईएएस अधिकारी खान ने यह भी लिखा है कि अलग-अलग मौकों पर मुसलमानों के नरसंहार को दिखाने के लिए एक किताब लिखने की सोच रहा था ताकि कश्मीर फाइल्स जैसी फिल्म कुछ निर्माता द्वारा बनाई जा सके, ताकि अल्पसंख्यकों के दर्द और पीड़ा को भारतीयों के सामने लाया जा सके।
