तुम काहे के डॉक्टर, जल्लाद हो बे – ✍️लखन शर्मा

By Abhishek Raghuvanshi
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ragging in mgm medical college

डॉक्टर, भगवान का रूप… यह बातें धीरे धीरे किस्से कहानियों में गुम होती जा रही है। क्योंकि यह पेशा अब सेवा न रहकर व्यापार तो हुआ ही है, बदनाम भी हो चुका है।

एमजीएम मेडिकल कॉलेज में हाल ही में सामने आया रैंगिंग का मामला सिर्फ रैंगिंग तक सीमित नहीं है। इसकी तह में जाकर सिर्फ पीड़ितों के बयान सुन लीजिए, आप बीती सुन लीजिए, आपकी रूह कांप जाएगी।

और ये सब कौन कर रहा है, भविष्य के तथाकथित, स्वयम्भू भगवान कहलाने वाले डॉक्टर…

ये जो अपने कॉलेज के छात्रों से आपस में अप्राकृतिक कृत्य करवा रहे हैं, ऐसे कई घिनोने काम फ्लेट पर करवा रहे हैं, ये क्या मरीजों का इलाज कर पाएंगे… ये तो वहां भी अवसर भुनाएंगे…

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इन जल्लादों की क्या ग्यारंटी है, की ब्रेस्ट कैंसर की किसी महिला का इलाज करते समय इनका नजरिया उनके प्रति ठीक रहेगा, उन पीड़ितों के वक्षों को ये उसकी मजबूरी की तरह देखेंगे, न कि अपने रोमांस के लिए… कोई ग्यारंटी नहीं…

खैर एमजीएम का ये ताजा मामला नहीं है…

कहाँ गए अब एमजीएम के एलुमिनाई वाले डाकसाब होण, जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन भी सामने नहीं आया… आईएमए जो हर बात पर डॉक्टरों के नाम पर नेतागिरी करता है, आज कहाँ है।

कोई नहीं है पीड़ितों के साथ, अभी कुछ दिन रुक जाइए… सब पीड़ित को दबाने, डराने में लग जाएंगे…

इतना सब होने के बाद भी कालेज ने अज्ञात पर एफआईआर दर्ज करवाई, आखिर क्यों….

डूब मरो रे, तुम्हारे भी बच्चे किसी कॉलेज में जाएंगे… तुम्हारी इन नापाक हरकतों से कोई सुसाइड कर लेगा, कोई जीवनभर आत्मगिलानी से बाहर नही आ पाएगा… ऐसे डॉक्टर बनोगे तुम, साले नामर्दों… इनका जो साथ देंगे न वे भी इतने ही दोषी हैं, कागजों पर भले ही यह दोष न आ पाए, लेकिन याद रखना….

नर्मदे हर, यहीं कर और यहीं भर

और अगर इतने बहादुर ही हो तो खुलेआम आओ बाजार में…. क्यों किसी के साथ बंद कमरे में यह जुल्म कर रहे हो…तुम काहे के डॉक्टर, जल्लाद हो बे – ✍️लखन शर्मा

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