क्या उदयपुर में हुए नरसंहार से नगरीय निकाय चुनाव पर पड़ेगा असर , इंदौर में लाखों राजस्थानियों में नाराजगी , कांग्रेस डैमेज कंट्रोल में जुटी

By Abhishek Raghuvanshi
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इंदौर । उदयपुर में कन्हैया लाल के गला काटने की घटना का असर नगरिय निकाय चुनाव पर पड़ सकता है । इंदौर में लगभग 3 लाख राजस्थानी बसे हुए हैं इतने बड़े वोट बैंक का कांग्रेस के प्रति आक्रोश खुलकर सामने आ रहा है। कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने इस खतरे को भांप लिया है और वे डैमेज कंट्रोल में भी लग गए हैं ।

राजस्थान के उदयपुर में दो मुस्लिम आतंकवादियों द्वारा टेलर कन्हैयालाल का तालिबानी आतंकवादी अंदाज में गला काट दिया गया। नूपुर शर्मा के बयान का समर्थन करने पर कन्हैयालाल को सजा दी गई उससे हिंदू वर्ग काफी नाराज है। उनकी नाराजगी राजस्थान की उस कांग्रेस सरकार के प्रति भी है जो मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते हिंदुओं की सरे आम हत्या रही है। आम पब्लिक है पूछ रही है हत्याकांड के आरोपियों के अब तक घर मकान दुकान कैसे सुरक्षित है इन आतंकी आरोपियों के अवैध धंधे अब तक नेस्तनाबूद गहलोत सरकार क्यों नहीं कर पाई है क्या मुस्लिम वोट बैंक इतना जरूरी है

उदयपुर में हुए इस जघन्य हत्याकांड के बाद लोगों के मन में कांग्रेस के प्रति आक्रोश है । कॉन्ग्रेस के नेताओं को डर सता रहा है कि चुनाव के ऐन पहले इस हत्याकांड के चलते लोग कांग्रेस से दूरी ना बना ले ।
इंदौर में ही लाखों राजस्थानी रहते हैं जो इस घटना से आक्रोशित है। कांग्रेस को डर है कि राजस्थान सरकार के प्रति राजस्थानीयों की नाराजगी मध्य प्रदेश के चुनाव पर भारी ना पड़ जाए । इसी कारण आज इंदौर में जहां विभिन्न व्यापारिक संगठनों ने बंद का आह्वान किया तो कांग्रेस ने भी लगे हाथ इसका समर्थन कर दिया और तो और कांग्रेस के नेताओं ने देवी अहिल्या प्रतिमा पर घटना के विरोध में मौन धरना रखकर अपने सारे पार्षद पद के प्रत्याशियों को वहां बुला लिया । कांग्रेस ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह भी इस घटना को लेकर कड़ी कार्रवाई चाहते हैं हालांकि देखना यह है कि कांग्रेस के इस मरहम से हिंदुओ का घाव कितना ठीक होता है।

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