इंदौर अब धीरे-धीरे कोरोना संक्रमण की चपेट से मुक्त हो रहा है, शहर को संक्रमण से मुक्त करने में न सिर्फ स्वास्थ्यकर्मियों और यहां की जनता का योगदान रहा है। बल्कि फ्रंट लाइन में खड़े पुलिसकर्मियों का भी शहर को संक्रमण से बचाने में खासा योगदान रहा। इस दौरान संभाग के 900 पुलिसकर्मी संक्रमित भी हुए हैं, जबकि 8 से 10 पुलिसकर्मियों की कोरोना से मौत भी हुई।
इंदौर को कोरोना संक्रमण से मुक्ति दिलाने में यहां के स्वास्थ्य विभाग जनता और अन्य लोगों का काफी प्रयास रहा है। वहीं संक्रमण से जंग में पुलिस विभाग की भी मुख्य भूमिका रही, पुलिस न सिर्फ पिछले लॉकडाउन में बल्कि इस साल लगाए गए जनता कर्फ्यू में मुस्तैद नजर आई और जनता कर्फ्यू का पालन करवाने में पुलिस की अहम भूमिका रही। यह पुलिस विभाग का ही प्रयास रहा कि शहर में जनता कर्फ्यू का जरा भी उल्लंघन नहीं हुआ और अधिकतर वही लोग घर से बाहर निकले जो कि आवश्यक सेवाओं से जुड़े थे, हालांकि ऐसे लोग जो बेवजह घरों से निकल रहे थे उन्हें पुलिस द्वारा अस्थाई जेल भी भेजा गया। इस तरह से शहर भर में कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने में काफी मदद भी मिली। पुलिस की यह मुस्तैदी पूरे इंदौर संभाग में भी देखने को मिली जिसके चलते अन्य जिले भी कोरोना संक्रमण से मुक्त होने लगे हैं। हालांकि ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण ने पुलिसकर्मियों को भी अपनी चपेट में लिया है। आईजी हरिनारायण चारी मिश्र के अनुसार इंदौर संभाग में 10 हजार से अधिक पुलिसकर्मी है, जिसमें से 900 पुलिसकर्मी संक्रमित हुए हैं, जबकि 8 से 10 पुलिसकर्मी की इस दौरान मौत भी हुई। गौरतलब है कि संक्रमित हुए पुलिसकर्मियों के उपचार के लिए विभाग द्वारा तमाम व्यवस्था भी की गई थी, जिसके चलते पुलिस लाइन में पुलिसकर्मियों और उनके परिवार के लोगों के लिए कोविड अस्पताल भी बनाया गया था।
