जय भारत परस्पर साख सहकारी संस्था में हुए करोड़ों के घोटाले के बाद सहकारिता उपायुक्त एमएल गजभिये ने संस्था के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य संचालकों को पद से हटाने के नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में कहा गया है कि यदि पदाधिकारी आरोपों के संबंध में सुनवाई का अवसर चाहते हैं तो उन्हें समक्ष में उपस्थित होना पड़ेगा। यदि किसी संचालक का कोई जवाब नहीं आता है तो उन्हें पद से हटाकर छह साल तक संस्था का चुनाव लड़ने के अयोग्य ठहराया जाएगा। सभी पदाधिकारियों को आारोपों के संबंध में जवाब और सुनवाई के लिए 15 दिन का समय दिया गया था, जो शुक्रवार को पूरा हो रहा है।
जिन पदाधिकारियों को नोटिस जारी हुए हैं उनमें अध्यक्ष हरप्रसाद रामदयाल, उपाध्यक्ष राकेश सुंदरलाल जैन, दुर्गाप्रसाद राजवाल, संचालक सुंदरलाल जैन, आजाद कुमार जैन, घनश्यामदास वर्मा, रोहित मंडलोई, अरविंद कुमार जैन, विकास जैन, देवकाबाई और द्रौपदीबाई शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि सहकारिता विभाग ने कुसुमबाई वर्मा और रेणुका शर्मा द्वारा की गई शिकायत पर सहकारिता अधिनियम की धारा-60 के तहत संस्था की समग्र जांच कराई थी। इस जांच में कई अनियमितताएं सामने आई थीं। जांच में सामने आया था कि बीड़ी श्रमिकों के नाम पर बनाई गई जय भारत सहकारी साख संस्था में कर्मचारियों का वेतन तो करीब 20 हजार रुपये मासिक है, लेकिन उनके खातों मेंं लाखों-करोड़ों रुपये जमा किए गए और निकाले भी गए हैं।
साथ ही 1999 से 2011 तक करीब 12 साल में यहां के 10 कर्मचारियों के बचत खातों में 23 करोड़ से अधिक का लेनदेन हुआ है। माना जा रहा है कि संस्था के कर्ताधर्ता पदाधिकारियों ने करोड़ों रुपये के हेरफेर के लिए कर्मचारियों के खातों का उपयोग किया। जिन कर्मचारियों के खातों में पैसे जमा कर निकाले गए हैं, उनमें संस्था प्रबंधक रहे अभय पाटौदी, जिनेंद्र जैन, मनीषसिंह ठाकुर, वीरेंद्र कुमार फूलचंद जैन, मनोहरलाल शाक्य, यशपाल जैन, कन्हैयालाल लिखार, आशीष नामदेव, बब्बनरा जैन शामिल हैं। संस्था में उपहार फंड, रजत जयंती फंड, हीरक जयंती फंड बनाकर सदस्यों के 1 करोड़ 5 लाख 20 हजार रुपये से अधिक मनमाने तरीके से खर्च कर डाले। इसमें ब्याज सहित 2.17 करोड़ का नुकसान संस्था को हुआ।
