भोपाल। सरकार के राजस्व का बड़ा भार आबकारी विभाग पर आता है। वर्तमान में कांग्रेस शासन की लागू आबकारी नीति को कोरोना काल में बगैर स्वरूप बदले मोनोपोली वाली नीति के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है। जिसके फायदे व नुकसान समानांतर ही साबित हो रहे है। वर्तमान में शिवराज सरकार से आबकारी नीति में बड़े परिवर्तन की आस लगाई जा सकती है।
आबकारी विभाग के नीति विशेषज्ञ अधिकारियों द्वारा जल्द होने वाली केबिनेट की बैठक में प्रस्तुत करने के लिए संशोधित नई आबकारी नीति के प्रस्ताव का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। जिसमे संभवतः बड़े शहरों में मोनोपोली चलन को खत्म कर शराब दुकानों के छोटे समूह बनाने का प्रस्ताव शामिल है।
इसके साथ ही अन्य राज्यो के मुकाबले में मध्यप्रदेश में शराब सबसे अधिक महंगी होना भी विभाग के लिए बड़ा चैलेंजिंग है। जिससे आये दिन हो रही दुर्घटनाओं का कारण भी यही साबित हो रही है। सीमित स्टाफ के साथ कार्य करने वाला आबकारी अमला अवैध व जहरीली शराब की घटनाओं पर पाबंदी लगाने में हमेशा ही अक्षम साबित होता रहा है, कारण साफ है कि अन्य राज्यो में शराब का सस्ती होकर प्रदेशभर में तस्करी होना बताया जाता है।
इसलिए विभाग द्वारा संभवतः शराब मूल्यों में एमएसपी व एमआरपी के तयशुदा मार्जिन को कम कर शराब मूल्यों में गिरावट लाने का प्रयास किया जा सकता है। हालांकि इसका ठेकेदारो द्वारा विरोध संभव है। इसके साथ ही बड़े बदलाव में राजस्व की चोरी रोकने व अवैध शराब विक्रय को कम करने हेतु अन्य प्रदेशों की तरह अंग्रेजी व देशी शराब दुकानों को एक ही करने का प्रस्ताव भी केबिनेट में रखा जाएगा।
