कलियुग में आदि शंकराचार्य साक्षात धर्म बनकर अवतरित हुए थे। आज सनातन धर्म, शास्त्र, मूर्तियों, पूजा पद्धति, त्यौहार आदि पर जिस तरह आघात हो रहे हैं, उससे भी प्रचंड हमला तब हो रहा था, तब आदि शंकर ने ठीक उस तरह सनातन को उबार लिया था, जैसे भगवान विष्णु ने वाराह के रूप में समुद्र में डूबी पृथ्वी को उबार लिया था।
धर्मो रक्षति रक्षितः। बिना धर्म को जाने हम धर्म की रक्षा नहीं कर सकते, और जब तक हम धर्म की रक्षा नहीं करते, धर्म हमारी रक्षा नहीं करेगा।
आज यह आवश्यक है कि हम आदि शंकराचार्य को और उनके बताए मार्ग को जानें और समझें तभी हम सनातन धर्म की रक्षा कर पाएंगे, अन्यथा पोलिटिकल हिंदू बनकर रह जाएंगे, जिनको नष्ट करना सिर्फ संख्यात्मक और चुनावी खेल है।
