विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने बुधवार की शाम प्रीतमलाल दुआ सभागृह में आयोजित हिंदुत्व का महत्व विषय पर व्याख्यान में कहा देश जब आजाद हुआ था तब लगा था कि देश में एकता और अखंडता होगी, पर ऐसा नहीं हुआ। देश भाषाओं की भिन्नता के कारण विभिन्ना राज्यों में बंटता गया। आज आवश्यकता है कि हम संगठित होने के लिए कदम उठाऐं। संगठित होकर हम एक मार्ग पर चलें। भारत में हिंदू संगठित इसलिए नहीं हैं क्योंकि हम बहुत सी जाति में बंटे हुए हैं। हिंदुत्व की बात नहीं करते बल्कि जातिगत भेदभाव कर रहे हैं। यही वजह है कि एकता स्थापित नहीं हो पा रही है। अपने अस्तित्व, महत्व को हमें समझना और समझाना होगा। भारत में धर्मांतरण के कारण हिंदुओं की संख्या घट रही है और अन्य धर्मावलंबियों की संख्या बढ़ रही है। आज केरल में 60 प्रतिशत से ज्यादा आबादी इसाई और मुस्लिम है। इसी तरह नागालैंड और मिजोरम में भी धर्मांतरण की वजह से 95 प्रतिशत आबादी इसाई हो चुकी है। बांग्लादेश में चुनाव के बाद 6 हजार हिंदू परिवारों पर जो अत्याचार किया गया उनके घरों में घुसकर हमला किया गया घर तोड़ दिए गए जला दिए गए वह सब बहुत भयावह था। आज वहां हिंदू सुरक्षित नहीं है। अन्य संप्रदाय के संगठन एकता के साथ कार्य कर रहे हैं। वे अपने धर्मावलंबियों को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक रूप से सक्षम लोगों से आर्थिक सहायता लेकर अपने समाज के उस वर्ग की मदद कर रहे हैं जिन्हें उसकी जरूरत है ताकि उन्हें भी आगे बढ़ाया जा सके। हम हिंदुओं को भी इस दिशा में ध्यान देना होगा। हमें ऐसे दल बनाने होंगे जो वैधानिक तौर पर हिंदुत्व के लिए कार्य करें।
